मंत्री दीपक प्रकाश को राज्यपाल ने किया एमएलसी मनोनीत, मंत्री बने रहने के रास्ते साफ!

SHARE:

रिपोर्ट- अमित कुमार

बिहार की राजनीति में आज एक अहम मोड़ आया है। राज्यपाल ने अधिसूचना जारी कर बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर दिया है।

इस फैसले के साथ ही उस संवैधानिक उलझन का भी पटाक्षेप हो गया है जो पि तयछले कुछ समय से मंत्री पद को लेकर बनी हुई थी। दीपक प्रकाश उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं और भाजपा कोटे से बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मंत्री बनने के बावजूद वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे और इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से सवाल भी किया था कि बिना सदन का सदस्य बने कोई व्यक्ति मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है। अब राज्यपाल के मनोनयन के बाद उनके मंत्री पद पर बने रहने का मार्ग पूरी तरह साफ हो गया है और वे अगले छह वर्ष तक विधान परिषद सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।

यह मनोनयन ऐसे समय में हुआ है जब कुछ दिन पहले ही भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उसी रिक्त सीट पर दीपक प्रकाश को नामित किया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को सरकार की रणनीति और संगठनात्मक संतुलन दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। पंचायती राज विभाग बिहार में ग्रामीण विकास की रीढ़ माना जाता है और इस विभाग के मंत्री के रूप में दीपक प्रकाश पर पंचायतों को और अधिक सशक्त बनाने, मनरेगा, आवास योजना और ग्रामीण सड़कों जैसी योजनाओं को धरातल पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि मैं राज्यपाल महोदय और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया। मुझे विधान परिषद में जनता की आवाज बनने का अवसर मिला है। मैं इस विश्वास को अपनी मेहनत और समर्पण से सिद्ध करूंगा। बिहार के गांवों का विकास मेरी प्राथमिकता है और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करके ही हम अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा सकते हैं।

अपने दूसरे बयान में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से जो संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा चल रही थी वह अब समाप्त हो गई है। अब पूरा ध्यान बिहार के विकास और गरीब कल्याण पर होगा। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने, डिजिटल पंचायत और पारदर्शी शासन की दिशा में तेजी से काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब अब काम से दिया जाएगा।

राज्यपाल के इस मनोनयन को भाजपा और एनडीए के भीतर एक संतुलित कदम माना जा रहा है। इससे न केवल सरकार को राहत मिली है बल्कि पंचायती राज विभाग में चल रही योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है। अब देखना होगा कि नए सदस्य के रूप में दीपक प्रकाश विधान परिषद में किस तरह अपनी भूमिका निभाते हैं और ग्रामीण बिहार के लिए क्या नई पहल लेकर आते हैं।

Join us on: