रिपोर्ट :- संतोष चौहान
सुपौल :- जनसुराज पार्टी ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में नया राजनीतिक इतिहास रचने में सफलता हासिल किया है, तो इस सफलता में जनसुराज की सुपौल जिला इकाई की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। दरअसल,प्रशांत किशोर की जीत सुनिश्चित करने के लिए वार्ड संख्या 36 की जिम्मेदारी सुपौल की टीम को सौंपी गई थी। सुपौल जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर पर लगातार जनसंपर्क, बैठकें और मतदाता संवाद अभियान चलाया, जिसका परिणाम मतदान के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। कुल 32 बूथों के मतदान परिणाम के अनुसार इस वार्ड में कुल 10,362 वोट डाले गए। इनमें जनसुराज को 5,047 वोट (48.71%), भाजपा को 3,916 वोट (37.79%) और राजद को 1,399 वोट (13.50%) मिले। जनसुराज ने भाजपा पर 1,131 वोटों की बढ़त दर्ज करते हुए करीब 10.92 प्रतिशत की निर्णायक बढ़त बनाई।
ज्ञात हो कि वार्ड संख्या 36 बांकीपुर विधानसभा का सबसे बड़ा वार्ड है। जीत के बाद जनसुराज के सुपौल जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने कहा कि यह केवल एक वार्ड की जीत नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक सोच का संकेत है। उन्होंने कहा कि सुपौल की टीम ने पूरी निष्ठा और संगठनात्मक मजबूती के साथ काम किया, जिसका परिणाम जनता के समर्थन के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर तो सिर्फ शुरुआत है। जनता बदलाव का मन बना चुकी है। अब यही संदेश पूरे बिहार में जाएगा और यह तय है कि आने वाले चुनावों में जनसुराज एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आएगा। उन्होंने इस सफलता का श्रेय वार्ड में दिन-रात मेहनत करने वाले सभी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को दिया तथा कहा कि संगठन इसी ऊर्जा के साथ पूरे बिहार में अभियान को और तेज करेगा।वहीं,राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वार्ड संख्या 36 के मतदान आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि यदि बूथ स्तर पर संगठन मजबूत हो तो जनसुराज जैसी नई पार्टी भी पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को बदलने की क्षमता रखती है।
5.29% से बढ़कर 48.71% तक पहुंची जनसुराज की वोटों की हिस्सेदारी:
इस जीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसी क्षेत्र में गत विधानसभा चुनाव में जनसुराज की स्थिति बेहद कमजोर रही थी। उस समय कुल 12,861 वोट पड़े थे, जिनमें भाजपा को 8,521 वोट (66.25%), राजद को 3,284 वोट (25.53%), जबकि जनसुराज को मात्र 680 वोट (5.29%) मिले थे। 376 वोट नोटा और अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गए थे। यानी, एक चुनाव में जनसुराज का वोट शेयर 5.29 प्रतिशत से बढ़कर 48.71 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह करीब 43.42 प्रतिशत अंकों की ऐतिहासिक बढ़त मानी जा रही है। वहीं भाजपा का वोट शेयर 66.25% से घटकर 37.79% पर आ गया, जबकि राजद भी 25.53% से घटकर 13.50% पर सिमट गई।
ध्वस्त हुआ राजनीतिक किला, दरक गए जातीय समीकरण :
अमूनन चुनाव का मतलब जातीय समीकरण होता है।लेकिन यहां जातीय समीकरण भी ध्वस्त होता नजर आया। पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का वार्ड संख्या-36 सामाजिक और जातीय समीकरण के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। इस वार्ड में कुल 27,754 मतदाता हैं। इनमें ओबीसी, ईबीसी और एससी वर्ग के मतदाता मिलाकर 83% हैं, जबकि जनरल वर्ग की हिस्सेदारी 17% है। यही वजह है कि यहां चुनाव केवल पार्टी नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण और बूथ प्रबंधन के आधार पर भी तय होता है। वार्ड में यादव (23%), कहार (12%) और राजपूत (9%) सबसे प्रभावशाली सामाजिक समूह हैं। इनके अलावा एससी मतदाताओं की 23% हिस्सेदारी किसी भी दल के लिए निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल केवल एक जाति के सहारे जीत दर्ज नहीं कर सकता। ओबीसी, ईबीसी और एससी वर्ग के व्यापक समर्थन के साथ-साथ जनरल वर्ग में भी प्रभावी पैठ बनाना चुनावी सफलता की कुंजी माना जाता है। इसी सामाजिक समीकरण के बीच जनसुराज ने इस बार 48.71% वोट हासिल कर भाजपा को 1,131 वोटों से पीछे छोड़ दिया। राजनीतिक जानकार इसे केवल वोटों की जीत नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण में हुए बड़े बदलाव का संकेत मान रहे हैं।
सुपौल की टीम ने संभाला मोर्चा, बूथ से लेकर जनसंपर्क तक निभाई अहम जिम्मेदारी:
जनसुराज के बांकीपुर चुनावी अभियान में सुपौल जिला इकाई ने सक्रिय भूमिका निभाई। पार्टी नेतृत्व द्वारा वार्ड संख्या-36 की जिम्मेदारी सुपौल की टीम को सौंपी गई थी। इसके बाद जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में जिले के विभिन्न प्रकोष्ठों और मोर्चों के पदाधिकारी पटना पहुंचे और चुनावी अभियान में बूथ प्रबंधन, घर-घर जनसंपर्क, मतदाता संवाद और संगठनात्मक समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। अभियान में शामिल प्रमुख पदाधिकारियों में राज्य कार्यकारिणी सदस्य अभय कुमार सिंह ‘मुन्ना’, अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष दानिश राशिद, मुख्य प्रवक्ता रीति झा, महिला जिलाध्यक्ष अनुराधा कुमारी पासवान, जिला महामंत्री बृजेश कुमार यादव, जनसुराज नेता मोहन , जिला सलाहकार सदस्य मो० दाऊद, जिला सलाहकार धरनीधर सिंह, पूर्व महिला जिलाध्यक्ष डॉ० नीलम सिंह, कोषाध्यक्ष सह कार्यालय प्रभारी मदन मोहन झा, अंबेडकर मंच अध्यक्ष विष्णुदेव सरदार, जन सुराज नेता सुरजीत सिंह पप्पू, डॉ० अजीत कुमार सिंह, उमाशंकर कामत, पूर्व जिला महामंत्री नरेश नयन, ओबीसी प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष तपेश्वर भारती, त्रिवेणीगंज के प्रमोद यादव, राघोपुर के प्रदीप भारती सहित अन्य शामिल थे।जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने कहा कि वार्ड 36 की जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की एकजुटता, अनुशासित संगठन और लगातार जनसंपर्क अभियान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर में मिली यह सफलता पूरे बिहार में जनसुराज के विस्तार की नई शुरुआत है। आने वाले विधानसभा चुनाव में इसी मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
टीम सुपौल की मेहनत ने लाई रंग,बदल गई पूरी फिजां,5.29% से 48.71% वोट शेयर तक जा पहुंचा जनसुराज
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड संख्या 36 की कमान जनसुराज की सुपौल टीम की थी जिम्मे
रिपोर्ट :- संतोष चौहान, सुपौल
सुपौल :- जनसुराज पार्टी ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में नया राजनीतिक इतिहास रचने में सफलता हासिल किया है, तो इस सफलता में जनसुराज की सुपौल जिला इकाई की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। दरअसल,प्रशांत किशोर की जीत सुनिश्चित करने के लिए वार्ड संख्या 36 की जिम्मेदारी सुपौल की टीम को सौंपी गई थी। सुपौल जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर पर लगातार जनसंपर्क, बैठकें और मतदाता संवाद अभियान चलाया, जिसका परिणाम मतदान के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। कुल 32 बूथों के मतदान परिणाम के अनुसार इस वार्ड में कुल 10,362 वोट डाले गए। इनमें जनसुराज को 5,047 वोट (48.71%), भाजपा को 3,916 वोट (37.79%) और राजद को 1,399 वोट (13.50%) मिले। जनसुराज ने भाजपा पर 1,131 वोटों की बढ़त दर्ज करते हुए करीब 10.92 प्रतिशत की निर्णायक बढ़त बनाई।
ज्ञात हो कि वार्ड संख्या 36 बांकीपुर विधानसभा का सबसे बड़ा वार्ड है। जीत के बाद जनसुराज के सुपौल जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने कहा कि यह केवल एक वार्ड की जीत नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक सोच का संकेत है। उन्होंने कहा कि सुपौल की टीम ने पूरी निष्ठा और संगठनात्मक मजबूती के साथ काम किया, जिसका परिणाम जनता के समर्थन के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर तो सिर्फ शुरुआत है। जनता बदलाव का मन बना चुकी है। अब यही संदेश पूरे बिहार में जाएगा और यह तय है कि आने वाले चुनावों में जनसुराज एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आएगा। उन्होंने इस सफलता का श्रेय वार्ड में दिन-रात मेहनत करने वाले सभी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को दिया तथा कहा कि संगठन इसी ऊर्जा के साथ पूरे बिहार में अभियान को और तेज करेगा।वहीं,राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वार्ड संख्या 36 के मतदान आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि यदि बूथ स्तर पर संगठन मजबूत हो तो जनसुराज जैसी नई पार्टी भी पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को बदलने की क्षमता रखती है।
5.29% से बढ़कर 48.71% तक पहुंची जनसुराज की वोटों की हिस्सेदारी:
इस जीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसी क्षेत्र में गत विधानसभा चुनाव में जनसुराज की स्थिति बेहद कमजोर रही थी। उस समय कुल 12,861 वोट पड़े थे, जिनमें भाजपा को 8,521 वोट (66.25%), राजद को 3,284 वोट (25.53%), जबकि जनसुराज को मात्र 680 वोट (5.29%) मिले थे। 376 वोट नोटा और अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गए थे। यानी, एक चुनाव में जनसुराज का वोट शेयर 5.29 प्रतिशत से बढ़कर 48.71 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह करीब 43.42 प्रतिशत अंकों की ऐतिहासिक बढ़त मानी जा रही है। वहीं भाजपा का वोट शेयर 66.25% से घटकर 37.79% पर आ गया, जबकि राजद भी 25.53% से घटकर 13.50% पर सिमट गई।
ध्वस्त हुआ राजनीतिक किला, दरक गए जातीय समीकरण :
अमूनन चुनाव का मतलब जातीय समीकरण होता है।लेकिन यहां जातीय समीकरण भी ध्वस्त होता नजर आया। पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का वार्ड संख्या-36 सामाजिक और जातीय समीकरण के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। इस वार्ड में कुल 27,754 मतदाता हैं। इनमें ओबीसी, ईबीसी और एससी वर्ग के मतदाता मिलाकर 83% हैं, जबकि जनरल वर्ग की हिस्सेदारी 17% है। यही वजह है कि यहां चुनाव केवल पार्टी नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण और बूथ प्रबंधन के आधार पर भी तय होता है। वार्ड में यादव (23%), कहार (12%) और राजपूत (9%) सबसे प्रभावशाली सामाजिक समूह हैं। इनके अलावा एससी मतदाताओं की 23% हिस्सेदारी किसी भी दल के लिए निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल केवल एक जाति के सहारे जीत दर्ज नहीं कर सकता। ओबीसी, ईबीसी और एससी वर्ग के व्यापक समर्थन के साथ-साथ जनरल वर्ग में भी प्रभावी पैठ बनाना चुनावी सफलता की कुंजी माना जाता है। इसी सामाजिक समीकरण के बीच जनसुराज ने इस बार 48.71% वोट हासिल कर भाजपा को 1,131 वोटों से पीछे छोड़ दिया। राजनीतिक जानकार इसे केवल वोटों की जीत नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण में हुए बड़े बदलाव का संकेत मान रहे हैं।
सुपौल की टीम ने संभाला मोर्चा, बूथ से लेकर जनसंपर्क तक निभाई अहम जिम्मेदारी:
जनसुराज के बांकीपुर चुनावी अभियान में सुपौल जिला इकाई ने सक्रिय भूमिका निभाई। पार्टी नेतृत्व द्वारा वार्ड संख्या-36 की जिम्मेदारी सुपौल की टीम को सौंपी गई थी। इसके बाद जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में जिले के विभिन्न प्रकोष्ठों और मोर्चों के पदाधिकारी पटना पहुंचे और चुनावी अभियान में बूथ प्रबंधन, घर-घर जनसंपर्क, मतदाता संवाद और संगठनात्मक समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। अभियान में शामिल प्रमुख पदाधिकारियों में राज्य कार्यकारिणी सदस्य अभय कुमार सिंह ‘मुन्ना’, अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष दानिश राशिद, मुख्य प्रवक्ता रीति झा, महिला जिलाध्यक्ष अनुराधा कुमारी पासवान, जिला महामंत्री बृजेश कुमार यादव, जनसुराज नेता मोहन , जिला सलाहकार सदस्य मो० दाऊद, जिला सलाहकार धरनीधर सिंह, पूर्व महिला जिलाध्यक्ष डॉ० नीलम सिंह, कोषाध्यक्ष सह कार्यालय प्रभारी मदन मोहन झा, अंबेडकर मंच अध्यक्ष विष्णुदेव सरदार, जन सुराज नेता सुरजीत सिंह पप्पू, डॉ० अजीत कुमार सिंह, उमाशंकर कामत, पूर्व जिला महामंत्री नरेश नयन, ओबीसी प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष तपेश्वर भारती, त्रिवेणीगंज के प्रमोद यादव, राघोपुर के प्रदीप भारती सहित अन्य शामिल थे।जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने कहा कि वार्ड 36 की जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की एकजुटता, अनुशासित संगठन और लगातार जनसंपर्क अभियान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर में मिली यह सफलता पूरे बिहार में जनसुराज के विस्तार की नई शुरुआत है। आने वाले विधानसभा चुनाव में इसी मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।




