रिपोर्ट :- संतोष चौहान
सुपौल :- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के निर्देश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के अध्यक्ष अनंत सिंह के मार्गदर्शन में शनिवार, 18 जुलाई 2026 को सुपौल न्याय मंडल में वर्ष का प्रथम स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष लोक अदालत का उद्देश्य परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से संबंधित चेक बाउंस के सुलह योग्य मामलों का आपसी समझौते के आधार पर त्वरित एवं नि:शुल्क निष्पादन करना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस स्पेशल लोक अदालत के सफल संचालन के लिए एक विशेष पीठ (बेंच) का गठन किया गया है। इस पीठ में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, सुपौल स्वेताभ सैंडिल्या को प्रतिनियुक्त किया गया है। उनके समक्ष केवल धारा 138 एन.आई. एक्ट के ऐसे मामले रखे जाएंगे, जिनका समाधान आपसी सहमति और सुलह-समझौते के आधार पर किया जा सकता है।
स्पेशल लोक अदालत की कार्यवाही शनिवार सुबह दस बजे से प्रारंभ होगी। इससे पूर्व व्यवहार न्यायालय, सुपौल परिसर में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया जाएगा। उद्घाटन समारोह के बाद संबंधित मामलों की सुनवाई शुरू होगी और पक्षकारों को एक ही मंच पर बैठाकर विवादों का शांतिपूर्ण एवं त्वरित समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार का मानना है कि लोक अदालत न्याय पाने का एक सरल, सुलभ और प्रभावी माध्यम है। इसमें पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है, समय और धन दोनों की बचत होती है तथा आपसी सहमति से विवाद समाप्त होने पर दोनों पक्ष संतुष्ट रहते हैं। लोक अदालत में होने वाले समझौते को न्यायालय के निर्णय के समान कानूनी मान्यता प्राप्त होती है और उसके विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता है।
विशेष रूप से चेक बाउंस से जुड़े मामलों में स्पेशल लोक अदालत काफी प्रभावी साबित होती है। इससे लंबित मामलों की संख्या कम होती है और वादकारियों को शीघ्र न्याय मिल पाता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने ऐसे सभी पक्षकारों से अपील की है जिनके मामले इस श्रेणी में लंबित हैं वे निर्धारित तिथि एवं समय पर न्यायालय में उपस्थित होकर आपसी समझौते के माध्यम से अपने विवाद का समाधान कराएं।
प्राधिकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्पेशल लोक अदालत में मामलों का निष्पादन पूर्णतः नि:शुल्क किया जाएगा। इसका उद्देश्य न्याय को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाना तथा न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार को उम्मीद है कि वर्ष के प्रथम स्पेशल लोक अदालत में बड़ी संख्या में पक्षकार भाग लेकर इस वैकल्पिक विवाद निपटान व्यवस्था का लाभ उठाएंगे।




