:- रवि शंकर अमित!
- किसानों को मिलेगा उचित मूल्य, कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होंगे
- पटना में तीन दिवसीय आम महोत्सव शुरू
- बिहटा स्थित एक्सपोर्ट पैक हाउस को मिला निर्यात लाइसेंस
पटना, 19 जून
किसानों को फसलों का उचित मूल्य दिलाने के साथ ही कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार कृषि उत्पाद निर्यात नीति बनाने जा रही है। इसकी घोषणा शुक्रवार को कृषि विभाग के माननीय मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने पटना स्थित बामेती परिसर में आयोजित तीन दिवसीय आम महोत्सव का उद्घाटन करने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एपीडा का कार्यालय भी खोल गया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
माननीय मंत्री ने बताया कि बिहटा में निर्मित एक्सपोर्ट पैक हाउस को मई में निर्यात लाइसेंस और क्लीयरेंस मिल गया है। इसके तुरंत बाद प्रदेश से फलों का विदेशी निर्यात शुरू हो गया है। 12 जून को 19 मेट्रिक टन जर्दालू, बम्बईया एवं दूधिया मालदह आम के दो कंटेनर दुबई निर्यात किए गए। पांच कंटेनर और शीघ्र रवाना होने वाले हैं। इसी तरह बांका जिले से 8.5 मेट्रिक टन दूधिया मालदह एवं जर्दालू आम अमेरिका भेजा गया। 10 मेट्रिक टन शाही लीची दुबई निर्यात की गई। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने लीची को 45 दिनों तक खराब न होने वाली तकनीक विकसित की है। इससे किसान बिचौलियों को हटाकर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ सकेंगे।
इस तीन दिवसीय महोत्सव में केवल आमों की प्रदर्शनी ही नहीं है इसमें बच्चों के लिए आम खाओ प्रतियोगिता, युवाओं के लिए ज्ञानवर्धक कार्यक्रम, कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए एआई का लाइव प्रदर्शन भी हो रहा है। मंत्री ने कहा कि एआई से किसान फसलों की बीमारियों की सटीक पहचान कर समय पर उपचार कर सकेंगे, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी। समारोह में प्राकृतिक खेती का संकल्प लिया गया।
माननीय मंत्री ने कहा कि हमें मिट्टी को रसायनों के प्रयोग से बचाना होगा। यह प्रयास प्राकृतिक खेती के नियमों को अपनाकर ही संभव हो सकता है। इस प्रयास से ही आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और समृद्ध भविष्य दे सकते हैं। उन्होंने युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करने और उन्हें कृषि उद्यमी बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। मंत्री ने भागलपुर के जर्दालू आम और दीघा के दूधिया मालदह को बिहार की पहचान बताया। साथ ही शाही लीची, मगही पान, कतरनी चावल, मखाना और मर्चा धान को जीआई टैग मिलने का उल्लेख किया। सरकार इन सभी उत्पादों को वैश्विक ब्रांड बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन सरकार’ को किसानों के हित में ईमानदारी से काम करने वाली बताते हुए कहा कि पारंपरिक खेती के साथ बागवानी, फल-फूल की खेती किसानों के लिए ‘एटीएम’ की तरह है।
मौके पर विभाग के प्रधान सचिव श्री नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि बिहार कृषि प्रधान राज्य है और यहां बागवानी का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उच्च मूल्य की फसलों वाली खेती, कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती और पोषण सुरक्षा के कारण बागवानी पारंपरिक अनाज आधारित खेती की तुलना में किसानों को कम जमीन पर अधिक आय दे रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हो रही है। राज्य में आम की विविध प्रजातियां जैसे दूधिया मालदह, जर्दालू, आम्रपाली, बंबईया आदि प्रसिद्ध हैं। जर्दालू आम को पहले से ही जीआई टैग प्राप्त है। महोत्सव में बागवानी की नवीन तकनीकें प्रदर्शित की गईं। श्री दास ने कहा कि उत्पादन के अनुरूप निर्यात अभी कम है, अतः गुणवत्ता, आधुनिक पैकेजिंग और निर्यात मानकों के अनुरूप नेटवर्क तैयार करने की जरूरत है। बिहार में 1.6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 15.84 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। फसलोत्तर प्रबंधन की बेहतर सुविधाओं के लिए सरकार कार्य कर रही है तथा स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, अंजीर जैसी उच्च मूल्य फसलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
बिहार किसान आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण मेहता ने कहा कि सुप्रसिद्ध दीघा का मालदा आम जो विलुप्त होने की कगार पर है, उसे संरक्षित करने की जरुरत है। साथ ही मशहूर सीपिया आम पर शोध करने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों के किए गए कार्यों की सराहना की।
पूर्व मंत्री सह फुलवारीशरीफ विधानसभा के विधायक श्याम रजक ने कहा कि कृषि क्षेत्र में किसानों की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कृषि रोड मैप की स्थापना की थी और राज्य में कृषि क्रांति की आगाज की थी। राज्य सरकार किसानों की आय को दुगुना करने के लिए कई कार्य कर रहे हैं।
महोत्सव में किसान चाची के नाम से प्रसिद्ध पदम्श्री राज कुमारी देवी, पदम्श्री सुधा वर्गी, आम उत्पादकों, कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।




