रिपोर्टर– राजीव कुमार झा
मधुबनी सदर मॉडल अस्पताल में मानवता शर्मशार होता रहा। उस वक्त अस्पताल परिसर मे अफरा-तफरी और मातम का माहौल बन गया, जब बेनीपट्टी प्रखंड के मकईया गांव के तीन वर्षीय मासूम समरजीत कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक बच्चा दिनेश सहनी का ती वर्षीय पुत्र था। घटना के बाद अस्पताल परिसर चीख-पुकार से गूंज उठा और हर किसी की आंखें नम हो गया।
मृतक मासूम के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चा सामान्य हालत में इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। आरोप है कि डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के कुछ ही देर बाद मासूम की तबीयत अचानक बिगड़ने लगा। परिजन कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां बदहवास होकर रोने लगी और पूरे अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया।
घटना का सबसे दर्दनाक एवं मानवता को झकझोर देने वाला दृश्य तब देखने को मिला, जब अपने कलेजे के टुकड़े को खो चुकी मां ने मासूम बेटे के शव को कंधे पर उठाकर अस्पताल में इधर-उधर जा जा कर मदद की गुहार लगाती रही। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से न तो एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई और न ही कोई कर्मचारी मदद के लिए आगे आया। एक मां अपने मासूम बेटे के शव को सीने से लगाकर अस्पताल के गलियारों में भटकती रही, लेकिन व्यवस्था मानवता को शर्मशार करता एवं पूरी तरह संवेदनहीन बना रहा।
गरीब परिवार घंटों तक बेटे के शव को घर ले जाने के लिए परेशान होता रहा। मृतक मासूम के परिजनों का कहना है कि अगर समय पर सही इलाज और इंसानियत के नाते थोड़ी मदद मिल जाती, तो शायद उनका बच्चा आज जिंदा होता। मां की चीखें और पिता की बेबसी देखकर वहां मौजूद लोगों की भी आंखें भर आईं। लेकिन अस्पताल कर्मियों का कलेजा पिघला नही।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर गरीब मरीजों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया। लोगों का कहना है कि मॉडल अस्पताल होने के बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में यहां मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।
पीड़ित परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टरों और कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं इस हृदयविदारक घटना के बाद गांव में मातम और अस्पताल कर्मियों के विरुद्ध लोगों में गहरा गुस्सा व्याप्त है।



