रिपोर्ट :- संतोष चौहान, सुपौल
देश के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक कुमार सानु की आवाज में गुंजेगी – सुपौल की शिक्षिका कल्याणी स्वरूपा की देश भक्ति गीत,अगस्त 2026 में होगी रिलीज
सुपौल :- सुपौल जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि – सपनों को उड़ान देने के लिए किसी महानगरों या धमाकेदार मंच की जरूरत नहीं होती। अगर प्रतिभा,लगन, मेहनत और जुनून सच्चा हो तो सरकारी स्कूल की एक साधारण शिक्षिका भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है।
ऐसा ही एक प्रेरणादाई कहानी सुपौल के एक छोटे से कस्बे से निकलकर सामने आई है। जहां गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली एक साधारण शिक्षिका की रचनात्मक प्रतिभा अब राष्ट्रीय पटल पर अपनी चमक बिखेरने जा रही है। सुपौल सदर प्रखंड के मध्य विद्यालय चकडुमरिया, में कार्यरत शिक्षिका एवं सुपौल नगर परिषद वार्ड नंबर-14 निवासी शिक्षिका कल्याणी स्वरूपा की लिखी देशभक्ति गीत अब देश के प्रसिद्ध पार्श्व गायक साधना सरगम के बेताज बादशाह “कुमार सानू” की आवाज में गूंजेगा।
यह गीत आगामी अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिलीज होगा, जिसे लेकर पूरे जिले में गर्व और उत्साह का माहौल व्याप्त है।
कल्याणी स्वरूपा की पुस्तक ”अंदाज जिंदगी के” में कुल 14 देशभक्ति गीत शामिल हैं। इन्हीं में से एक भावपूर्ण राष्ट्रीय गीत ”जब कभी हम अपना तिरंगा लहराएंगे, सीमा से जो ना लौटे वह शहीद याद आएंगे” को पार्श्व गायक कुमार सानू ने अपनी आवाज दी है। गीत की रिकॉर्डिंग 01 मई 2026 को पूरी हो चुकी है और इसे स्वतंत्रता दिवस से लगभग 15 दिन पहले रिलीज करने की तैयारी की जा रही है।
कल्याणी स्वरूपा ने बताया कि उनके सोशल साइट पर पोस्ट को देखने के बाद कुमार सानू की म्यूजिक कंपनी के डायरेक्टर पिट्टू कुमारी ने उनसे संपर्क किया। इसी माध्यम से उन्हें मुंबई पहुंचने और कुमार सानू से मुलाकात करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार पल था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा- बचपन से मेरा सपना था कि मेरे लिखे गीत किसी बड़ी आवाज में गाये जाएं और फिल्मों में इस्तेमाल हों आज वह सपना सच होता नजर आ रहा है।
बचपन से ही लिखने-पढ़ने की थी आदत ने पूरा कर दिया सपना।
जब मैं बहुत छोटी थी, तब लिखना तो आता था लेकिन कागज संभालना नहीं आता था, मेरी मां उन कागजों को सहेजकर रखती थीं, तभी से गीत लिखना मेरी आदत और सपना बन गया।
कल्याणी की बचपन की सहेली एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय बलुआ की प्रधानाचार्य डॉ० अर्चना कुमारी ने कहा कि बचपन से ही कल्याणी के सपनों को उन्होंने बहुत करीब से देखा है। उन्होंने रामायण की चौपाई “जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू, सूत न मिली न मिलिहे न कुछ संदेहू” का उल्लेख करते हुए कहा कि कल्याणी की मेहनत और प्रतिभा का परिणाम आज पूरे जिले के सामने है। जो राष्ट्रगीत से लेकर राष्ट्रहित में सफलता की कुंजी बनकर खड़ा है।
कल्याणी स्वरूपा की इस उपलब्धि को लेकर स्थानीय शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं और संगीत प्रेमियों में भारी उत्साह का माहौल व्याप्त है। शिक्षा जगत से लेकर कला एवं संगीत के क्षेत्र में भी अब सुपौल का नाम राष्ट्रीय पटल पर चमकने जा रहा है। कल्याणी स्वरूपा ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, दोस्तों और सहयोगी शिक्षकों को देते हुए कहा कि स्कूल की जिम्मेदारियों के साथ-साथ लेखन को जारी रखना आसान नहीं था, लेकिन सभी के सहयोग और प्रेरणा ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। जिसका परिणाम आज सबके सामने है।
कल्याणी स्वरूपा की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि पूरे सुपौल जिले और बिहार के उन हजारों शिक्षकों के लिए प्रेरणा का श्रोत है, जो क्लासरूम में खड़े होकर भी बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। अगस्त 2026 में रिलीज होने वाली यह गीत देशभक्ति की भावना को जगाने के साथ-साथ युवाओं और शिक्षकों को भी यह संदेश देगा कि सच्ची मेहनत – लगन और दृढ़ संकल्प से हर सपना को साकार किया जा सकता है।
वहरहाल जो भी हो पर सरकारी स्कूल की , एक साधारण शिक्षिका की लिखी राष्ट्रीय गीत स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कुमार सानू की आवाज में राष्ट्रीय पटल पर जब अपना परचम लहराएगी, “एक शाम शहीदों के नाम” हर जुबां पे फिर याद आएगी। “जय हिन्द”




