प्रस्तुति – डॉ अनमोल कुमार
दूसरों को जीना सिखाओगे क्या….?
क्योंकि पत्रकार सिर्फ खबर नहीं लिखता,
वो समाज का आईना होता है, जो सच को बिना रंग-रोगन के सामने रखता है।
तुम्हारी कलम कभी सवाल बनेगी,
कभी हथियार,
और कभी किसी बेबस की आखिरी उम्मीद।
तुम्हें डराया जाएगा, दबाया जाएगा,
कभी खरीदा भी जाएगा,
पर असली पत्रकार वही है
जो इन सबके बीच भी बिकता नहीं, झुकता नहीं।
हाँ, रास्ता मुश्किल है,
पर हर मुश्किल के पार एक सुकून भी है। जब तुम्हारी एक खबर से
किसी को न्याय मिलता है,
जब किसी की आवाज़ तुम्हारे शब्दों में ताकत पाती है। तब समझ आ जाएगा, कि यह पेशा नहीं, एक जिम्मेदारी है, एक जुनून है, एक मिशन है।
तो अगर इस राह पर आना है, तो सिर्फ सपने लेकर मत आना…
हिम्मत, ईमान और सच्चाई भी साथ लाना।
क्योंकि यहाँ नाम कमाने से पहले खुद को साबित करना पड़ता है, और जब तुम सच में पत्रकार बन जाओगे, तो लोग तुम्हें तुम्हारे नाम से नहीं,
तुम्हारी सच्चाई से पहचानेंगे।




