रिपोर्ट – अमित कुमार
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आज हम यहां कारगिल चौक पर, अपने हाथों में मशाल लेकर सिर्फ अंधेरा दूर करने नहीं आए हैं। हम आए हैं उस अंधेरे को दूर करने जो ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम 2026 हमारे अधिकारों पर डालना चाहता है। साथियों, सरकार कहती है कि ये संशोधन हमारे भले के लिए है। लेकिन हम पूछना चाहते हैं कि भला किससे पूछकर? क्या इस कानून को बनाने से पहले हमारे समुदाय से एक बार भी बात की गई? जब कानून हमारे शरीर के बारे में, हमारी पहचान के बारे में, हमारे जीने के तरीके के बारे में हो, तो फैसला भी हमारा होना चाहिए। हमारे बारे में, हमारे बिना नहीं। ये सिर्फ नारा नहीं, हमारा हक है।
इसलिए आज इस मशाल जुलूस से हमारी मांग साफ है कि ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम 2026 को तुरंत वापस लिया जाए। जब तक समुदाय के लोगों, एक्टिविस्ट और कानूनी एक्सपर्ट्स के साथ खुली चर्चा न हो, कोई भी बदलाव मंजूर नहीं है। सेल्फ आइडेंटिफिकेशन का अधिकार हमसे न छीना जाए। हम क्या हैं, ये तय करने का हक सिर्फ हमारा है, किसी सर्टिफिकेट, किसी मेडिकल जांच या किसी सरकारी कमेटी का नहीं। साथ ही हम चाहते हैं कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में हमारे लिए भेदभाव खत्म हो। आरक्षण और संवेदनशील नीतियां बनें ताकि हम भी सम्मान से जी सकें। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव पर सख्त कानून लागू हो और उनका पालन सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर भी हो।
ये रेनबो झंडे सिर्फ रंग नहीं हैं साथियों। ये हमारे हौसले का रंग है, हमारे दर्द का रंग है, और हमारे प्यार का रंग है। हम भी इसी देश के नागरिक हैं। हमें भी वही संविधान अधिकार देता है जो आपको देता है। अनुच्छेद 14, 15, 21 हमारे लिए भी हैं। तो आज कारगिल चौक से हम ये मशाल लेकर शपथ लेते हैं कि जब तक हमारे अधिकार सुरक्षित नहीं होंगे, हमारी लड़ाई जारी रहेगी। क्योंकि हक मांगने से नहीं मिलते, हक छीनने पड़ते हैं। क्या चाहिए अधिकार, कब चाहिए अभी। ट्रांस राइट्स आर ह्यूमन राइट्स।




