बलिराजगढ़ में एएसआई की खुदाई शुरू- विदेह काल के 2500 वर्ष पुराने रहस्य खुलने के आसार!

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रिपोर्टर– राजीव कुमार झा!

राजा बली के गढ के रुप मे जाना जाता है इस ऐतिहासिक व प्राचीन स्थान को

ऐंकर– मिथिला की पावन धरती मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक बलिराजगढ़ (स्थानीय रूप से राजा बली का गढ़) में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मार्च 2026 के अंत में वैज्ञानिक खुदाई शुरू कर दी है। लगभग 176 एकड़ क्षेत्र में फैले इस विशाल किले के उत्खनन से मिथिला की प्राचीन सभ्यता और विदेह महाजनपद काल के गौरवशाली इतिहास पर नया प्रकाश पड़ने की उम्मीद जगी है। खुदाई की शुरुआत होते ही यहां प्राचीन ईंटों की मजबूत संरचनाएं, मिट्टी के बर्तन, मनके और अन्य महत्वपूर्ण अवशेष मिलने लगे हैं। खास तौर पर पक्की नालियों के अवशेष सामने आए हैं, जो लगभग 200 ईसा पूर्व के उन्नत शहरी नियोजन की ओर इशारा करते हैं। पुरातत्वविदों का मानना है कि बलिराजगढ़ लौह युग (आयरन एज) के विदेह राज्य का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र रहा होगा। यहां से 2500 वर्ष पुरानी सभ्यता के प्रमाण उजागर हो सकते हैं, जो प्राचीन भारत के शहरी विकास को नई दिशा देगा। एएसआई की पटना सर्किल द्वारा संचालित इस खुदाई का मुख्य लक्ष्य ‘वर्जिन सॉइल’ तक पहुंचकर मानव बस्ती की प्रारंभिक अवधि का सटीक निर्धारण करना है। इससे पहले 1962-63, 1972-75 और 2013-14 में यहां छोटे स्तर पर उत्खनन हुए थे, लेकिन अब पहली बार बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा रही है। खुदाई अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन विशेषज्ञ आगे और रोमांचक खोजों की संभावना जता रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, इतिहासकारों और समाजसेवियों ने इस प्रयास का हार्दिक स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी। बलिराजगढ़ जैसे स्थल क्षेत्रीय पर्यटन को नई उड़ान दे सकते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मधुबनी जिला प्रशासन ने भी खुदाई स्थल की सुरक्षा और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं पर जोर दिया है। पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह खोज न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मिथिला की गौरवपूर्ण परंपराओं को पुनर्जीवित करने में भी सहायक सिद्ध होगी। खुदाई जारी है और जल्द ही और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

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