सिक्का उछालकर मैदान से भाग जाते हैं राहुल गाँधी – बृजभूषण शरण सिंह!

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रिपोर्ट- अमित कुमार!

बृजभूषण का राहुल गांधी पर तीखा प्रहार:
राहुल गांधी पर हमला: बृजभूषण बोले- “राहुल को पता ही नहीं कब क्या बोलना चाहिए।”
LPG क्राइसिस पर घेरा: सर्वदलीय बैठक में शामिल न होने पर उठाए सवाल।
महंगाई का बचाव: पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को वैश्विक युद्ध और संकट से जोड़ा।
ममता पर चुप्पी: बंगाल की बर्बादी वाले बयान पर टिप्पणी करने से किया इनकार।

पूर्व सांसद और दबंग नेता बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने तीखे तेवरों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उनके निशाने पर कोई और नहीं, बल्कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हैं। एलजी (LPG) क्राइसिस और देश के ज्वलंत मुद्दों पर हुई सर्वदलीय बैठक में राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर बृजभूषण ने उन पर बड़ा हमला बोला है।

बृजभूषण शरण सिंह ने राहुल गांधी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी ‘सिक्का उछालकर मैदान से भागने वाले’ नेता हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर राहुल गांधी को यह ज्ञान हो जाए कि उन्हें कब और क्या करना चाहिए, तो वह देश का बड़ा भला कर देते।” बृजभूषण यहीं नहीं रुके, उन्होंने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन के तरीकों पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि सिलेंडर रखकर रील (Reel) बनाने से कुछ नहीं होगा। नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन्हें सरकार के सामने सुझाव रखने चाहिए, न कि केवल शोर मचाना चाहिए।

​ पेट्रोल की कीमतें और युद्ध

जब पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये की बढ़ोतरी पर उनसे सवाल किया गया, तो उन्होंने सरकार का बचाव करते हुए इसे वैश्विक परिस्थितियों से जोड़ दिया। उन्होंने कहा:
​”दुनिया में कहीं आटा नहीं है, कहीं प्याज नहीं है। जब पूरी दुनिया संकट में है, तो उसका असर भारत पर भी पड़ेगा। इसीलिए युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, केवल वार्ता ही रास्ता है।”

मध्य एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध और उस पर विपक्ष की राजनीति को लेकर भी पूर्व सांसद ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने साफ़ कहा कि दुनिया में लगी इस आग को बुझाने के लिए मध्यस्थता जरूरी है और विपक्ष को इस पर राजनीति करके कुछ हासिल नहीं होने वाला।

​ ममता बनर्जी और एस. जयशंकर का संदर्भ

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस आरोप पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार बंगाल को समाप्त करना चाहती है, बृजभूषण ने कन्नी काट ली और कहा कि वे इतने बड़े सवाल का जवाब नहीं देंगे। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर के उस बयान का उन्होंने पुरजोर समर्थन किया, जिसमें जयशंकर ने कहा था कि देश में संसाधनों की नहीं बल्कि एक जिम्मेदार ‘लीडर ऑफ अपोजिशन’ की कमी है।

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