MDM घोटाला, सुरक्षा बलों के ठहराव से बंद रहा विद्यालय, फिर भी कागजों पर डकार ली राशि!

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संवाददाता:- लक्ष्मण कुमार!

CM के दरभंगा दौरे में भी MDM घोटाला बेखौफ।
सुरक्षा बलों के ठहराव से बंद रहा विद्यालय, फिर भी कागजों पर बच्चों को खिलाकर सरकारी राशि डकार ली।

दरभंगा: बिहार सरकार भले ही शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि भ्रष्टाचार का नेटवर्क सिस्टम के भीतर इतनी गहराई तक पैठ चुका है कि अब उसे मुख्यमंत्री की मौजूदगी का भी डर नहीं रहा। इसका ताजा और शर्मनाक उदाहरण दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय देकुली से सामने आया है, जहां विद्यालय बंद रहने के बावजूद कागजों पर मध्याह्न भोजन (MDM) संचालित दिखाकर सरकारी राशि की बंदरबांट कर ली गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के क्रम में दरभंगा पहुंचे थे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत जिले के कई विद्यालयों में बाहर से आए सुरक्षा बलों को ठहराया गया था। इसी क्रम में मध्य विद्यालय देकुली में भी सुरक्षा बलों का ठहराव कराया गया, जिसकी पूर्व सूचना विद्यालय की प्रधान शिक्षिका पामिला कुमारी को प्रशासन द्वारा लिखित रूप से दी जा चुकी थी। सुरक्षा बलों के ठहराव के कारण उस दिन विद्यालय में पठन-पाठन पूर्णतः स्थगित था और बच्चे विद्यालय नहीं आए।
इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखते हुए प्रधान शिक्षिका द्वारा न केवल बच्चों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई, बल्कि मध्याह्न भोजन वितरण का झूठा रिकॉर्ड भी तैयार कर लिया गया। यह कृत्य स्पष्ट रूप से सरकारी धन की लूट, दस्तावेजी फर्जीवाड़ा और सेवा नियमों का घोर उल्लंघन है।

जब मीडिया ने इस गंभीर अनियमितता पर प्रधान शिक्षिका से सवाल किया तो उन्होंने पहले पूरे मामले से साफ इनकार कर दिया। लेकिन जब बच्चों, अभिभावकों और विद्यालय की रसोइया के बयान सामने रखे गए, तो उन्होंने यह कहते हुए गलती स्वीकार कर ली कि
“गलती हो गई है, इसे रफादफा कर दीजिए।
यह बयान अपने आप में यह साबित करने के लिए काफी है कि यह कोई भूल नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया कृत्य था।
विद्यालय के बच्चों, उनके अभिभावकों और रसोइया दीदी ने एक स्वर में बताया कि 28 जनवरी को विद्यालय में एक भी बच्चा उपस्थित नहीं था। कुछ बच्चे विद्यालय पहुंचे भी, तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि स्कूल बंद है। जब विद्यालय बंद रहा और बच्चे उपस्थित ही नहीं थे, तो एमडीएम पकाने और बांटने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय में लंबे समय से एमडीएम के नाम पर खुला खेल चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
इस संबंध में जब प्रखंड एमडीएम प्रभारी संगीता कुमारी से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने “अभी व्यस्त हूं” कहकर फोन काट दिया। वहीं डीपीओ (MDM) अवधेश कुमार आवश्यक कार्य से जिले से बाहर बताए गए, जिससे उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
अब सवाल सिर्फ एक नहीं, कई हैं
जब विद्यालय बंद था, तो एमडीएम की एंट्री किसके आदेश पर हुई।
फर्जी उपस्थिति और फर्जी भोजन वितरण की जांच कौन करेगा।
क्या सिर्फ प्रधान शिक्षिका पर कार्रवाई होगी या प्रखंड व जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?
आखिर किन अधिकारियों के संरक्षण में MDM के नाम पर यह लूट वर्षों से चल रही है।
मुख्यमंत्री के गृह जिले में, उनके दौरे के दौरान हुआ यह मामला पूरे शिक्षा तंत्र और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखना यह है कि खबर के बाद यह मामला फाइलों में दबा दिया जाता है या दोषी कर्मियों पर वास्तविक और कठोर कार्रवाई होती है।

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