पंकज कुमार जहानाबाद।
जहानाबाद की NEET छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और हत्या का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है. नीतीश सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की है. राज्यपाल ने इसकी मंजूरी भी दे ही. लेकिन छात्रा के परिजनों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है. छात्रा के परिजनों को सीबीआई जांच पर भी भरोसा नहीं है. परिजनों ने मांग की है कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की निगरानी में कराई जाए.
परिजनों ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें न तो बिहार सरकार पर भरोसा है और न ही बिहार पुलिस पर. उनका कहना है कि अगर सरकार वास्तव में निष्पक्ष जांच चाहती है, तो इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की निगरानी में कराई जाए.परिजनों का आरोप है कि राज्य सरकार की एसआईटी और अब प्रस्तावित सीबीआई जांच दोनों पर उन्हें भरोसा नहीं है. उनका कहना है कि जिस तरह से एसआईटी ने अब तक काम किया है, उससे यह आशंका गहरी हो गई है कि अहम सबूतों को या तो नष्ट कर दिया गया है या मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है.
पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि डीजीपी से हुई मुलाकात के दौरान उनका व्यवहार बेहद अपमानजनक और धमकी भरा था. परिजनों के अनुसार, डीजीपी ने उन्हें यह कहकर डराने की कोशिश की कि अगर केस सीबीआई को सौंप दिया गया, तो एजेंसी उन्हें दो साल तक दौड़ाती रहेगी. इस बयान से परिवार मानसिक रूप से बेहद आहत है.परिजनों का कहना है कि उनकी बेटी पहले ही अपनी जान और इज्जत गंवा चुकी है, और अब प्रशासन उन पर दबाव बनाकर मामले को खत्म करना चाहता है.
छात्रा के परिजनों का दावा है कि उन्होंने सीबीआई जांच की मांग कभी नहीं की थी. उनका कहना है कि शुरुआत से ही वो न्यायिक जांच की मांग कर रहे थे.परिवार का आरोप है कि बिहार पुलिस सबूतों को मिटाकर या कमजोर कर सीबीआई को सौंप देगी, जिससे सच्चाई कभी सामने नहीं आ पाएगी. यही वजह है कि अब उन्हें सीबीआई पर भी भरोसा नहीं रह गया है. पीड़ित परिजनों की मांग है कि इस जघन्य अपराध की जांच हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए, तभी उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है.




