आचार्य कुणाल किशोर साहब की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें दी गई श्रद्धांजलि।

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रिपोर्ट- अमित कुमार!

हम उनके व्यक्तित्व और कार्यों को याद करते हैं। उन्होंने 2010 में श्रवण कुमार पुरस्कार शुरू किया था, जो उनके सेवा और परोपकार के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

कुणाल साहब ने धर्म को सेवा से जोड़ा, और उन्होंने दिखाया कि कैसे धर्म और सेवा एक साथ हो सकते हैं। उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर काम किया, और इस मुद्दे को खत्म करने के लिए उन्होंने राम मंदिर पर किताब भी लिखी।

कुणाल साहब के कार्यों का प्रभाव आज भी देखा जा सकता है, जैसे कि महावीर कैंसर संस्थान की स्थापना। यह संस्थान उनकी सोच और परोपकार की भावना का प्रतीक है।

हम कुणाल साहब के बच्चों और अनुयायियों से अपील करते हैं कि वे उनके कार्यों को पूरा करने का संकल्प लें, और उनके दिखाए हुए रास्ते पर चलते हुए समाज सेवा में योगदान दें।

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