रिपोर्टर — राजीव कुमार झा!
कड़ाके की ठंड के बाबजूद प्रखंड सह अंचल कार्यालय पर 15 सूत्री मांगों के समर्थन में सैकड़ो आंदोलनकारियों ने भाकपा-माले के नेतृत्व में किया प्रदर्शन
नितीश सरकार में 65 महादलित पर्चाधारी परिवारों को 21 वर्षो के बाद भी नहीं मिला पर्चा वाली भूमि पर दखल कब्जा, स्थानीय प्रशासन व भू-माफियाओं के गठजोड़ से पर्चा वाली सहित अन्य सरकारी भूमि कि खरीद-विक्री होने के कारण नहीं मिल रहा है भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल भूमि — भाकपा-माले
कमला वीयर को रूपांतरित करने में अंचल जयनगर और भू-अर्जन विभाग व भू-माफिया गठजोड़ से सरकारी भूमि व दुसरे के भूमि पर करोड़ों रुपये का हुआ अवैध भूगतान, मांगों पर कार्रवाई जल्द नही होने पर होगा अनिश्चितकालीन दिन-रात का महाजुटान — भूषण सिंह
मधुबनी जिले के जयनगर भाकपा माले प्रखंड सचिव भूषण सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों आंदोलनकारियों ने कड़ाके की ठंड के बाबजूद स्टेशन परिसर से झंडा बैनर के साथ जुलूस निकाला जो महावीर चौक भेलवा चौक होते हुए प्रखंड कार्यालय गेट पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर एवं महात्मा गांधी के स्मारक पर पहुंच कर माल्यार्पण करते हुए प्रखंड सह अंचल कार्यालय जयनगर के समक्ष पहूंच कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए प्रखंड सचिव भूषण सिंह ने कहे कि नितीश सरकार में जयनगर में 21 वर्षो बाद भी कुआढ़ मौजा के 15 एवं उसराही-देवधा मौजा के 50 महादलित भूमिहीन पर्चाधारी को वर्ष 2004 में भूहदबंदी के तहत दी गई पर्चा वाली भूमि पर कब्जा दिलाने में नाकाम है। तो दुसरी ओर विना वैकल्पिक व्यवस्था के ही गरीबों के घर व जिबीकाओं पर बुलडोजर चला कर गरीब-दलित को बेघर किया गया है। स्थानीय प्रशासन और भू-माफिया के गठजोड़ के कारण पर्चा वाली भूमि पोखर तथा अन्य सरकारी भूमि पर दबंग भू-माफियाओं का कब्जा है। जिसके कारण उक्त जमीन को अवैध तरीके से खरीद-विक्री भी किया जा रहा हैं। जिसके कारण आम भूमिहीन परिवारों को अभियान बसेरा योजना-2 के तहत 5 डिसमिल भूमि नहीं मिल रहा है और जयनगर बस्ती व रजौली पंचायत सहित अन्य पंचायतों में वर्षो से वसे महादलित भूमिहीन परिवारों को पर्चा नहीं दिया गया। दुसरी ओर कमला वीयर जयनगर को रूपांतरित करने में जयनगर अंचल और भू-अर्जन विभाग मधुबनी व भू-माफियाओं के गठजोड़ से कागजी दाव-पेंच के तहत अवैध तरीके से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी किया गया है। अंचल कार्यालय के लापरवाही से दाखिल खारिज परिमार्जन भूमि की मापी परिवारिक सूची प्रमाण पत्र के लिए लोग परेशान हैं। वही हाल है सरकारी व निजी स्वास्थ्य संस्थानों का, इन संस्थाओं को लेकर कागज पर ही खाना पूर्ति किया जा रहा हैं। तो वही निजी स्वास्थ्य संस्थानों में आम लोगों को आर्थिक दोहन का शिकार होना पड़ता है। खाद-बिज कि कालाबाजारी से किसान परेशान हैं। विकास योजना में व्याप्त अनियमितता है। ग्रामीण मजदूर हितैषी मनरेगा योजना को समाप्त कर जी राम जी सैसी मजदूर विरोधी योजना थोपा गया है। देश के बड़े बड़े उद्योगपतियों का करोड़ों रुपये माफ किया जा रहा है। दुसरी ओर जिबीका सहित अन्य माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से जूड़े महिला समूहों के महिलाएं कर्ज के तले दबकर बाल-बच्चो के साथ घर छोड़ कर विस्थापित होने पर मजबूर है। ऐसी कई महिलाएं आत्महत्या कर चूकी है। अधिसूचित क्षेत्र समिति की गठन 19 नवंबर 1955 में हुआ था और नगर पंचायत में तब्दील 30 अगस्त 2001 को किया गया लेकिन बड़े दायरे में शहरी क्षेत्रों में विस्तार होने के वाबजूद व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण नगर परिषद में विस्तार नहीं हो सका। लेकिन राजपाल के गजट के आलोक में इस बार नगर परिषद में तब्दील होने कि उमिद है। प्रदर्शन कारियों ने अपने 15 सुत्री मांग पत्र अंचलाधिकारी अखिलेश चौधरी को सोंपा।
आयोजित सभा को मुस्तफा, नरेश ठाकुर, तस्लीम, फुलो देवी, सीताराम राम, जागेश्वर राम, जितेंद्र कुमार, नजाम, मुमताज, महेश्वर पासवान, सीताराम राम, रामु पासवान, फूलो देवी, शिवो देवी, महेंद्री देवी, रानी, पहाड़ी सदाय, भोला पासवान,जानकी देवी, कुशमा देवी, मोहन पासवान सहित दर्जनों लोगों ने संबोधित किया ।




