दरभंगा-टिकट बंटवारे से नाराज राजद अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के नेताओं का सामूहिक इस्तीफा!

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दरभंगा संवाददाता :- लक्ष्मण कुमार!

दरभंगा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी नेतृत्व पर उपेक्षा और पक्षपात का आरोप, बोले – “अति पिछड़ा समाज को केवल वोट बैंक समझा गया”

दरभंगा। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में असंतोष गहराता जा रहा है। पार्टी के अति पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ से जुड़े लगभग 50 नेताओं ने टिकट बंटवारे में उपेक्षा और पक्षपात का आरोप लगाते हुए सामूहिक इस्तीफा दे दिया।

दरभंगा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाराज नेताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई और पार्टी सुप्रीमो सहित शीर्ष नेतृत्व पर “आम कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने” का गंभीर आरोप लगाया।

राजद अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. कुमार गौरव ने कहा, “हम अति पिछड़ा समाज वर्षों से राजद के लिए खून-पसीना बहा रहे थे, लेकिन टिकट बंटवारे में इस समाज को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। पार्टी में अब विचारधारा नहीं, बल्कि व्यक्ति-विशेष की चापलूसी और आर्थिक ताकत का बोलबाला है।”

उन्होंने आगे कहा कि दरभंगा जिले के कुछ नेता केवल अपने और अपने परिवार के हित साधने में लगे हैं। टिकट नहीं मिलने के बाद पार्टी नेतृत्व या जिला के वरिष्ठ नेताओं ने फोन पर जिज्ञासा तक नहीं दिखाई।

डॉ. गौरव ने आरोप लगाया, “पार्टी नेताओं ने मंच से कहा था कि टिकट सर्वे रिपोर्ट और सामाजिक भागीदारी के आधार पर दिया जाएगा, लेकिन सभी घोषणाएं मंच तक ही सीमित रह गईं। अति पिछड़ा समाज की हिस्सेदारी की बातें केवल भाषणों में सुनाई दीं।”

पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष भोला सहनी, जो इस्तीफा देने वालों में शामिल हैं, ने कहा कि पार्टी में समर्पित और ईमानदार कार्यकर्ताओं का मनोबल लगातार टूट रहा है। उन्होंने कहा कि “हम सम्मानजनक राजनीति करेंगे, न कि अपमानजनक समझौते।”

इस्तीफा देने वालों में प्रदेश और जिला स्तर के कई पदाधिकारी, प्रखंड अध्यक्ष और पंचायत स्तर के नेता शामिल हैं। इन नेताओं में प्रमुख रूप से भोला सहनी (पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सह प्रदेश महासचिव), डॉ. कुमार गौरव (प्रदेश उपाध्यक्ष), गोपाल लाल देव (प्रधान महासचिव), राम सुंदर कामत (जिला महासचिव), सुशील सहनी (प्रदेश सचिव), देवन सहनी, राजाराम लालदेव (प्रखंड अध्यक्ष बहेरी), भरत कुमार सहनी, प्रीति कुमारी (प्रखंड अध्यक्ष गौड़ाबोराम), संजना देवी, अजय कुमार साहू, अजय सहनी, मनमोहन कामत, सुजीत गौरव (प्रधान महासचिव), सरस्वती देवी, इं. रंजीत देव, विक्रम कुमार सत्संगी, रूपेश कुमार दास, पिंटू यादव, हरे रामदास, प्रमोद यादव, मनोज कुमार शाह, राहुल प्रसाद, महेश लाल देव, अमरेश कुमार, विनोद कुमार लाल, राजीव कुमार, शिवजी लाल देव, वेवी देवी, सुनील कुमार महतो (महानगर अध्यक्ष), देवराज महतो, शंभू लाल देव, सतनारायण लालदेव, संतोष कुमार मंडल, रमाशंकर शर्मा, कमल यादव उर्फ कमलेश्वर यादव, संतोष राम, राजेश कुमार और समसुल हक समेत दर्जनों नाम शामिल हैं।

इन सभी नेताओं ने राजद की प्राथमिक सदस्यता और अपने-अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया है।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसे राजद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर उस समय जब चुनाव प्रचार अपने चरम पर है।
नाराज नेताओं ने कहा कि “राजद की जो पहचान गरीब, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग की पार्टी के रूप में थी, अब वह केवल नाम मात्र रह गई है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सामूहिक इस्तीफा न केवल राजद के आंतरिक संकट को उजागर करता है, बल्कि आगामी चुनाव में महागठबंधन के जातीय समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।

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