रिपोर्टर — राजीव कुमार झा!
मधुबनी जिले के जयनगर से खुलने वाली स्वतंत्रता सेनानी ट्रेन जैसे ही मधुबनी स्टेशन पर पहुंची कुंभ जाने के लिए एसी बोगी में चढ़ने के लिए यात्री ने तोड़ा एसी बोगी का सीसा। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि
ये श्रद्धालु हैं या “उपद्रवी”। कुंभ स्नान को लेकर चरमरा सा गया रेल व्यवस्था को लेकर सरकार एवं विभाग को सोचनी चाहिए। ऐसे में ट्रेन से सफर करने वाले वृद्ध, बीमार, विकलांग, बच्चा एवं महिलाओं को हो रही दुर्गतिऔर फजीहत को देखते हुए फौरन कारगर कदम उठाने की जरूरत है। तीर्थयात्रा के नाम पर रेल की सम्पत्ति को नूकसान पहूंचाया जाना, रिजर्वेशन बाली सीटो पर सफर करने वाले यात्रियों के सीटों पर जबरन कब्जा जमा कर बैठ जाने जैसे गायर कानूनी कार्य किए जाते रहने और रेल प्रशासन विवश और निष्प्रभावी दिखाई देने को क्या कहा जा सकता है आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं। ऐसे अराजक स्थिति पैदा करने बालो को खुद सोचना चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में सनातन धर्म उन्हें दूसरों को कष्ट देने का इजाजत नहीं देता है। सनातन में दुसरो का कष्ट को अपना कष्ट समझ कर पीड़ित को सहायता पहुंचाने को धर्म कहा गया है।




