औरंगाबाद पिता ने ठेला चलाकर बेटा को बनाया जज, माता ने जीविका समूह से लिए कर्ज!

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रिपोर्ट- रुपेश कुमार!

कहा जाता है ना की आर्थिक स्थिति कभी किसी के सफलता में बाधक नहीं बनता है। कहीं से ना कहीं से जीवको पार्जन का लोग साधन ढूंढ लेते हैं और अपने बाल बच्चे को पढ़ा लिखा कर सफल बना देते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड अंतर्गत शिवगंज में देखने को मिला। एक पिता ने ठेले पर अंडा बेचकर, ब्रेड बेचकर अपने बेटे को बेहतर शिक्षा दिया। शुरुआत से ही प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया उसके बाद पटना के चाणक्य लॉ कॉलेज में दाखिला दिलाया और अब बेटा पांच साल की पढ़ाई पूरी कर जज बनकर घर लौटा है। बेटे को जज बनकर घर लौटने पर मां की खुशी से आंखों में आशु है। मां रोते हुए अपनी गरीबी की दुखड़ा को बताया है। पहले सुनते हैं उस मां को

तो अपने उस मां को सुना मां अपने जीवन से जुड़ी सभी बातों को बता रही थी। अब आपको उस पिता को सुनाते है जो ठेला पर अंडा बेचकर बेटा को पढ़ाया लिखाया और जज बना दिया।

घर के परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों ने बधाई देते हुए क्या कुछ कहा वो आइए आपको सुनाते हैं।

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