सुपौल- बसंतपुर में खुला माँ का पट, हजारों की उमड़ी भीड़, लगे माँ के जयकारे

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रिपोर्ट :- संतोष चौहान, सुपौल।

सुपौल :- जिले के बसन्तपुर प्रखंड अंतर्गत बलभद्रपुर पंचायत स्थित शक्तिपीठ दुर्गामंदिर में सप्तमी के मौके पर खुला माता का पट, हजारों की संख्या में उमड़ी श्रद्धालुओ की भीड़, भक्तो ने लगाए माता के जयकारे। हिन्दू मुस्लिम के आपसी सौहार्द का प्रतीक है बलभद्रपुर का शक्तिपीठ दुर्गा मंदिर
सुपौल जिले के बसन्तपुर प्रखंड के बलभद्रपुर पंचायत के बलभद्रपुर बाजार स्थित शक्तिपीठ दुर्गामंदिर में बुधवार क़ो माता के पट खुलते ही माता के दर्शन और पूजा – अर्चना को लेकर हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
ज्ञात कि इस मंदिर में भक्त जो भी मनोकामना लेकर जाते हैं उनकी मनोकामनाएं पूरी होती है। यही कारण है कि वर्ष 1932 से अबतक इस मंदिर में शारदीय नवरात्रा के मौके पर श्रद्धालु अपनी अपनी मनोकामना लेकर पूजा करने और माता के दर्शन को लेकर श्रद्धा भाव से पहुंचते हैं।  इतना ही नही पूरे वीरपुर अनुमण्डल क्षेत्र में इस शक्ति पीठ पर सबसे अधिक भीड़ होती है क्योकि मंदिर की ख्याति और प्रसिद्धि दूर- दूर तक होने के चलते सीमावर्ती राष्ट्र नेपाल से भी पूरे नवरात्रा के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है।

मंदिर कमिटी के लोगों ने बताया कि दशमी के अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और पूजा अर्चना की जाती है। बताया जा रहा है कि विजयादशमी के मौके पर गाजे- बाजे के साथ महिला एवं पुरुष श्रद्धालु जमीन पर लेट कर दण्डप्रणाम करते हुए मंदिर की परिक्रमा करते हैं। और ये वही लोग होते हैं जिनकी मुरादें अबतक पूरी हुई है। 

पूजा कमिटी के अध्यक्ष महेन्द्र गोठिया ने बताया कि कमिटी के द्वारा मेडिकल केम्प, सीसीटीवी, वोलेंटियर, जिला पुलिस बल, ग्राम रक्षादल, पीने के शुद्ध पेयजल, शौचालय की व्यवस्था की गई है ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की तकलीफ ना हो। वही इसके अलावे सीतापुर दुर्गा मंदिर में विजया दशमी के मौके पर 56 भोग माता को लगाया जाता रहा है और इसी 56 भोग का प्रसाद भक्तों को दिया भी जाता है।

बलभद्रपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मो० तौहीद ने बताया कि भले यहाँ मुस्लिम जनसंख्या अधिक है लेकिन दुर्गा पूजा के दौरान दोनों ही धर्म के लोग एक साथ कन्धा से कन्धा मिलाकर 10 दिनों तक सेवाभाव से कार्य करते हैं।
बलभद्रपुर पूजा कमिटी में महिंद्र गोठिया, उपाध्यक्ष रमेश मेहता, सचिव संदीप पोद्दार, कोषाध्यक्ष राकेश गोईत, पूर्व अध्यक्ष सूर्यनारायण मेहता, विनोद चोरवार, घनश्याम चौधरी, दिनेश बरियेत, बिनोद कुमार मेहता, संतोष गोठिया, हरिश्चंद्र सोनी आदि ने पुरे 10 दिनों तक सेवाभाव से लोगों के सुविधा का ख्याल रखता है।

मंदिर का है गौरवपूर्ण इतिहास

बताया जा रहा है कि सबसे पहले गढ़बनेली राज के अंतर्गत कोसी के भीतर यह नदी में स्थापित थी।
कोसी में अधिक जलश्राव होने के बाद लोगों ने इसे सीतापुर में स्थापित किया। सीतापुर के बाद मंदिर क़ो अररिया जिले के बबुआन महेशपट्टी में अवस्थित किया गया और इसके बाद अंत में पांच सौ लोगों के समूह के साथ हाथी – घोड़े व उत्सव मनाकर बलभद्रपुर में वर्ष 1932 में इस मंदिर क़ो स्थापित किया गया। जिसके बाद से अबतक यानी 92 वर्षों से बलभद्रपुर में ही मंदिर में पूजा अर्चना की जा रही है। ये अलग बात है कि पहले मंदिर का स्वरूप छोटा था लेकिन कालांतर में भक्तों की मनोकामना पूरा होने के बाद इसे शक्तिपीठ का दर्जा देकर हर वर्ष जीर्णोद्धार का कार्य होता है। लगभग आठ कट्ठे में फैले इस मंदिर का वर्तमान ढांचा काफ़ी आकर्षक है। जो आने वाले श्रद्धांलुओं क़ो अपनी ओर आकर्षित करता है। लगभग 30 लाख की लागत से इसी वर्ष पंचायत समिति मद से मंदिर परिसर के भीतर सतह के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा किया गया है जो आने वाले लोगों का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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