रामायण केवल पौराणिक कथा या काव्य नहीं, जीवन दर्शन है!

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प्रस्तुति – अनमोल कुमार

जन्तम् राम रामेति मधुरम् मधुराक्षरम्।

आरुह्य कविता शाखाम् वन्दे वाल्मिकी कोकिलम्।। रामायण केवल एक काव्य या पौराणिक कथा नहीं है। रामायण जीवन दर्शन है। ज्ञानगंगा है। मर्यादा वाहक है। सुकुमार सुकोमल कोटि कन्दर्प से अधिक शौर्यवान राजकुमार से मर्यादा पुरुषोत्तम बनने कि पूण्य पावन गाथा है। श्री राम से मर्यादा पुरुषोत्तम बनने के पिछे केवल श्री रामजी का त्याग,आदर्शमय जीवन नहीं है। श्री रामचंद्र जी का मर्यादा पुरुषोत्तम बनने के पिछे महालक्ष्मी सती सीता माता का पातिव्रत धर्म, सतित्व कि पराकाष्ठा, भरत,लक्ष्मण, और शत्रुघ्न जैसे भाईओं के त्याग, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठ अतुलनीय सेवा भक्ति और तपनिष्ठ भ्रताप्रेम जो कि युगों युगों में विरल है। कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा जैसी माताओं कि अपलक नयनों से प्रतिक्षा। रामायण का और एक प्रच्छदपट नायिका जिनके त्याग के बिना तो ये सम्भव हि नहीं हो पाता। वो महान आदर्श चरित्र है लखन जी की पत्नी उर्मिला देवी । और भक्त शिरोमणि पवन पुत्र संकट मोचन हनुमान जी l

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