पति से प्रताड़ित रश्मि ने सांसद से लगाई  गुहार, संजय झा ने लिया संज्ञान!

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रिपोर्टर — राजीव कुमार झा

संजय कुमार झा ने झंझारपुर डीएसपी को फोन कर निष्पक्ष एवं जांच करने का दिया निर्देश

डॉक्टर और पुलिस ने पैसों के लालच में मेरे जीवन को किया नासूर,मैं हूँ बेकसूर: रश्मि

निष्पक्ष जांच और इंसाफ के लिए पिछले तीन सालों से दर-दर भटक रही है रश्मि,इंसाफ की लगा रही गुहार

तीन बार डीएम, चार बार एसपी, दो बार डीएसपी और एक बार दरभंगा आरक्षी महानिरीक्षक को आवेदन देकर इंसाफ की लगा चुकी है गुहार

रश्मि प्रकरण ने यहां के सिस्टम की कलई खोलने के लिए है काफी

ऐंकर– पति द्वारा डॉक्टर और पुलिस को पैसे देकर झूठा इंजुरी रिपोर्ट बनावा कर 307 के मुकदमा में भाई को जेल भेजे जाने के बाद से परेशान हैं रश्मि।पति के प्रताड़ना से तंग आकर पिछले तीन वर्षों से निष्पक्ष जांच और इंसाफ के लिए कभी डीएसपी तो कभी एसपी, कभी डीएम तो कभी डीआईजी के पास जाकर इंसाफ की गुहार लगाने वाली लखनौर थाना क्षेत्र के महुली गांव का ओम प्रकाश ठाकुर की 35 वर्षीय पत्नी रश्मि कुमारी ने अररिया संग्राम स्थित राज्यसभा सांसद सह पूर्व मंत्री संजय कुमार झा के आवास पर पहुंच कर उनसे मुलाकात कर इंसाफ की गुहार लगाई है। रश्मि ने अपने पति द्वारा पैसों के दम पर कराया गया मनगढ़ंत व झूठा एफ आई आर और डॉक्टर की फर्जी इंजुरी रिपोर्ट को लेकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।उन्होंने श्री झा को कहा कि जब घटना ही नही हुई तो फिर शार्प और ग्रिभियस इंजूरी रिपोर्ट कैसे डॉक्टर ने बना दिया। इतना कहते ही रश्मि फूट-फूट कर रोने लगी। राज्ससभा सांसद ने इंसाफ का आश्वासन देते हुए ढाढस बंधाया उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के शासन में महिलाओं पर अत्याचार बर्दाश्त नही किया जाएगा। उन्होंने झंझारपुर डीएसपी पवन कुमार को फोन कर मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने को लेकर निर्देश दिया और कहा कि निर्दोष फंसना नहीं चाहिए और दोषी बचना नही चाहिए।

क्या है मामला —

सुपौल जिले के बिंदेश्वर चौबे की पुत्री रश्मि कुमारी की विवाह आठ वर्ष पूर्व मधुबनी जिले के लखनौर थाना क्षेत्र अंतर्गत महुली गांव के ओमप्रकाश ठाकुर के साथ हुई थी। रश्मि ने अपने पति और ससुराल वालों पर कई गंभीर और संगीन आरोप लगाई हैं। उन्होंने डीएसपी, एसपी, डीएम और आरक्षी महा निरीक्षक दरभंगा को दिए आवेदन में बताया है कि उनके पति और ससुराल वालों द्वारा शादी के कुछ महीने बाद से ही दहेज के रूप में सोने की चेन,अंगूठी, बाइक और 5 लाख नगद रुपए की मांग किए जाने लगा। दहेज नहीं देने पर उनके साथ थर्ड डिग्री टॉर्चर किया जाता था। उनके साथ बेरहमी से मारपीट किया जाता था। पीड़िता को कई दिनों तक खाने के लिए भी नहीं दिया जाता था। आगे रश्मि ने बताई हैं कि इतना ही नहीं जब मेरे मायके से फोन आता था तो ससुराल के लोगों फोन से नहीं करने देते थे, बोलते थे इतना दहेज दो नहीं तो हम इसे जान से मार देंगे। किसी तरह जान बचाकर मैं मायके गई तब जाकर जान बचा। फिर जाकर दहेज उत्पीड़न को लेकर प्राथमिक दर्ज कराई थी। इधर दहेज उत्पीड़न को लेकर मामला माननीय व्यवहार न्यायालय सुपौल में चल ही रहा था कि इस बीच मेरे पति ओम प्रकाश ठाकुर द्वारा पुलिस और डॉक्टर को पैसों के दम पर मेरे और मेरे भाईयों के विरुद्ध फर्जी इंजूरी रिपोर्ट तैयार करवा कर 307 का झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया। मुकदमा की जानकारी मुझे तब हुई जब लखनौर थाना पुलिस मेरे भाई को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। तब तक तीन महीना हो चुका था। मेरे पति द्वारा लखनौर थाना में दिनांक 5 /4/ 2021 को मेरे और मेरे भाईयों पर झूठ और मनगढ़ंत एफआईआर दर्ज कराया गया था। एफआईआर में मेरे बड़े भाई उम्र 38 वर्ष गणेश कुमार चौबे और मेरे छोटे भाई उम्र 34 वर्ष अमन कुमार चौबे को नामजद आरोपी बनाया गया। एफआईआर में मेरे पति ने आरोप लगाया कि मैं और मेरे भाई अपने मायके सुपौल से महुली गांव आए और उन्हें अपने साथ चार चक्का वाहन में बैठाकर घर से 2 किलोमीटर दूर ले जाकर हम लोगो के द्वारा जान से मारने का प्रयास किया गया और बुरी तरह मारपीट कर मरा हुआ समझकर सड़क किनारे फेंक दिया जिसके बाद मेरे पति की मधेपुर पीएससी में इलाज कराया गया। उन्होंने मधेपुर में इलाज कराये जाने पर सवाल उठाते हुए कडी़ आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि मेरे घर से महज चंद किलोमीटर की दूरी पर लखनौर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। इलाज लखनौर में होना चाहिए था ना कि मधेपुर में, जब घटना ही नहीं घटी तो इलाज कैसे हुआ। और तो और बिना सिर पर कटे फटे ही डॉक्टर ने पैसे लेकर शार्प कट ग्रीभीयस इंजूरी कैसे बना दिया। इंजरी रिपोर्ट के आधार पर लखनौर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर झूठे मुकदमे में हमारे भाई को गिरफ्तार कर लिया गया और पुलिसिया वर्दी का गलत इस्तेमाल किया गया। जब खाकी रक्षक के बदले भक्षक बन जाए तो लोगों का जीवन नासूर हो ही जाता है। बड़े भाई बेल पर हिरासत से बाहर आए ही कि पुलिस छोटे भाई को भी गिरफ्तार करने के लिए परेशान कर रखी है। पुलिस रात को 12 बजे और 2 बजे रात को सोए हुए अवस्था में रेड करती है जैसे कि मेरा भाई कोई बड़ा आतंकवादी हो। उन्होंने अपने आवेदन में बताया कि घटना के दिन मैं और मेरा भाई सुपौल में ही थी कहीं बाहर नहीं गई थी। मोबाइल टावर लोकेशन से इसका जांच कराई जा सकती है। इतना ही नहीं यदि गाड़ी से ले जा रहा था तो कौन सा गाड़ी था, कैसा गाड़ी था, गाड़ी का नंबर क्या था, जब हम लोग मार रहे थे तो घटना किसने देखा? और तो और मेरे पति को गंभीर अवस्था में मधेपुर पीएससी में इलाज हुआ ही नही है। अगर मेरे पति के साथ मारपीट हुआ रहता और वे गंभीर रूप से घायल रहते तो बेहतर इलाज के लिए डीएमसीएच दरभंगा या फिर पीएमसीएच पटना जरूर रेफर किया गया होता। घटना के दिन मेरे पति बिल्कुल ही ठीक थे वह अपने घर में संचालित कंप्यूटर दुकान में बिहार माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी दसवीं के छात्रों का रिजल्ट निकल रहे थे। जिसका प्रमाण मेरे ससुराल के घर में लगे सीसीटीवी फुटेज और कंप्यूटर के जानकार विशेषज्ञों से जांच करने पर स्पष्ट हो जाएगी। आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। मधेपुर पीएससी के आउटडोर रजिस्टर में दर्ज उपचार कराए जाने की इसकी सत्यता सामने आ जाएगी न्याय हित में यह जरूरी है। आगे
रश्मि कुमारी ने बताई है कि मैं इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही हूं डॉक्टर और पुलिस ने मिलकर मेरे पति के साथ मेरा जीवन नासूर बना दिया है। जल्दी मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं मजबूर होकर अपने बच्चों के साथ आत्महत्या कर लूंगी। उन्होंने बताया कि मैं सुपौल से झंझारपुर डीएसपी, मधुबनी एसपी, मधुबनी डीएम, दरभंगा आरक्षी महानिरीक्षक के पास दौड़ दौड़ कर परेशान हो चुकी हूं मुझे न्याय नहीं मिल पा रहा है अगर मुझे न्याय नहीं मिला तो मेरा पूरा परिवार बर्बाद हो जाएगा। अब देखना होगा राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा के पहल के बाद भी इंसाफ मिल पाता है या नहीं। आखिर मामले में अंतिम परिणाम जो भी हो लेकिन यहां पुलिस से लेकर डाक्टरों के कार्य प्रणाली पर बार बार सवाल खड़े किए जाते रहे हैं और दोनों विभागों ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर अपने को साफ सुथरे साबित करने में सफल होते रहे हैं।

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