रिपोर्टर– राजीव कुमार झा
महाशिवरात्रि को लेकर मिथिला के देबघर कपिलेश्वर सहित विभिन्न शिवालय में उमड़ी श्रद्धालुओ की भीड़
चार दिनों तक चलने बाली शिवरात्री महापर्व को लेकर भक्तिमय हुआ माहौल
मधुबनी जिले के पस्चमी भाग पर स्थित रहिका प्रखंड क्षेत्र के मिथिलांचल के प्रसिद्ध देवघर बाबा कपिलेश्वर नाथ महादेव मंदिर, सौराठ के प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिर माधबेश्वर नाथ, शोमनाथ, जयनगर प्रखंड के सिला नाथ, बेनीपट्टी के मां छीन्नमस्तिका उचैठ, गाण्डेश्वर, बानेश्वर, बासोपट्टी के कलानेश्वर, कलुआही प्रखंड के राजराजेश्वरी, बतहू नाथ, हरलाखी के फुलहर, मनोकामना मंदिर, बिस्फी के भैरव बाबा स्थान,पंडौल के उग्रनाथ, सरसोपाही स्थित शंकर डिह, मधबापुर के उतरा गांव की मंदिरों सहित अन्य मंदिरो मे सुबह से रात भर हजारों शिवभक्तों की भीड़ सुबह कतार लगा कर दर्शन पूजन करते देखे गए। शिवभक्तो ने हर हर महादेव बोल बम के जयकारे से शिवालय गूंजता रहा। कपालेश्वर के मंदिर परिसर मे शंतोष पंडा ने कहा सुबह से दोपहर के एक बजे तक 40 से 50 हजार भक्त पूजा कर चुके हैं। अभी भी कतार काफी लंबी हैं भीड़ के मद्देनजर रहिका थाना पुलिस पुरी तरह मुस्तैदी बरत रही है। यहां आने बाले श्रद्धालुओ को किसी तरह की परेशानी ना हो इसलिए सुबह से ही पुलिस पदाधिकारी व पुलिस जवानो के साथ ही मंदिर प्रशासन परिसर के बाहर और अंदर मुस्तैद है। मौके पर मौजूद रहिका थाना अध्यक्ष रविंद्र कुमार ने बताया सुबह 4 बजे से ही सभी आवस्यक जगहो पर पुलिस बल को प्रतिनियुक्ति की गई हैं। सामाजिक तत्वों पर भी पैनी नजर रखी जा है। हुरदंग मचाने वाले को किसी भी सूरत में बक्सा नहीं जाएगा। मंदिर पूजा समिति के सदस्य ने कहा भक्तों की अपार भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन का भरपूर सहयोग मिल रहा हैं। आज से चार दिनो तक महाशिवरात्रि को लेकर शिव भक्तो की भीड़ देखने को मिलेगा। जगह जगह राती के समय महाशिवरात्रि महोत्सव के साथ संस्कृति कार्यकर्म का आयोजन किया गया। तो कपिलेश्वर स्थान के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सदर एसडीपीओ राजीव कुमार,सदर अनुमंडल पदाधिकारी अश्विनी कुमार , रहिका अंचलाधिकारी अभय कुमार थाना अध्यक्ष रविंद्र कुमार के साथ समस्त मेला कमिटी सदस्य मैजुद रहें। यहा हर वर्षा की तरह दिनांक 09और 10 मार्च को दंगल प्रतियोगिता आयोजित कि गया हैं। महाशिव रात्रि को लेकर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बड़े ही धूमधाम व शांतिपूर्ण माहौल मे शिव विवाहोत्सव मनाया गया।
बताते चलें की मिथिला से भगवान शिव का गहरा नाता रहा है। त्रेतायुग हो, द्वार, सतयुग से लेकर कलयुग काल के प्रमाणिकता को समेटे यहां आज भी शिव मंदिरो का मौजूद होना ये दरवाजे के लिए काफी है कि यहां के लोग पौराणिक समय से ही शिव भक्त रहै है।




