रिपोर्ट:-निभाष मोदी

देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने भागलपुर को उपहार स्वरूप दिया था यह विश्वविद्यालय!
कई गौरवशाली इतिहास को समेटे हुए हैं विश्वविद्यालय: कुलपति
भागलपुर। आज तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय का 62 वा स्थापना दिवस मनाया गया । इस कार्यक्रम की शुरुआत शहीद तिलकामांझी के मूर्ति पर फूल माला चढ़ाकर किया गया उसके बाद विश्वविद्यालय के ध्वज को फहराया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलगीत से शुरू की गई फिर दीप प्रज्वलन का कार्यक्रम किया गया, उसके बाद केक कटिंग किया गया। बताते चलें कि दीप प्रज्वलन में तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की कुलपति नीलिमा गुप्ता, प्रति कुलपति ,सचिव, कुलसचिव, डीएसडब्ल्यू ,प्रॉक्टर , एनएसएस के अधिकारी आदि संयुक्त रुप से सम्मिलित थे ।उसके बाद सबों को विश्वविद्यालय की ओर से मोमेंटो प्रदान किया गया तथा सबों ने अपना उद्गार व्यक्त किया। आज के इस 62 में स्थापना दिवस पर एमएलसी एनके यादव एवं भागलपुर के सांसद अजय मंडल भी मौजूद थे। उन्हें भी विश्वविद्यालय के मोमेंटो से सम्मानित किया गया साथ ही जितने भी सेवानिवृत्त कर्मचारी थे उन्हें भी सम्मान दिया गया। इस कार्यक्रम में सभी महाविद्यालय के प्राचार्य भी कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित थे। सचमुच यह विश्वविद्यालय अपने आप में कई गाथाओं को संजोए हुए हैं।
तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति ने अपने संवाद में कहा कि अभी हमलोग कोरोना काल से जूझ रहे हैं। हमें इस कोरोना काल ने लड़ने की क्षमता सिखाई है ।इस स्थापना दिवस में कोरोना को जागरूक करते हुए उन्होंने यह भी कहा की कोविड-19 के नियमों का पालन करते रहें और सबों को वैक्सीनेशन लेना जरूरी है और जो व्यक्ति वैक्सिंन नहीं लिए हैं उन्हें भी प्रेरित करना जरूरी है , कुलपति ने अपने संवाद में सबों को 62 वें स्थापना दिवस को लेकर बधाई देते हुए कहा कि 62 वर्ष बहुत लंबी अवधि होती है उसमें अगर हम सभी किसी भी रूप में कार्यरत हैं या इससे जुड़े हैं चाहे वह विद्यार्थी हो शिक्षक हो या पदाधिकारी हो उनके लिए गौरव की बात है, क्योंकि भागलपुर तिलकामांझी विश्वविद्यालय अपने आप में बहुत कुछ संजोए हुए हैं और इसका गौरवशाली इतिहास रहा है।साथ ही उन्होंने कहा आज से लंबे अंतराल के बाद कॉलेज खुला है सभी बच्चों को भी कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई करने की बात कही। वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से लॉकडाउन के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में भी विश्वविद्यालय ने कई कैंप किए जिसमें वेक्सिनेशन कैंप , डिग्नोस्टिककैंप, वृक्षारोपण ,जागरूकता अभियान, समूह दौड़ आदि प्रमुखता से कराया गया। उनका यह भी कहना हुआ कि हमें सबों के सहभागिता से शोध ,शिक्षा और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में और बेहतर काम करने की जरूरत है ताकि अवश्य विद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपना नाम रोशन करें साथ ही कोरोना में जितने लोगों का निधन हो गया है उनके लिए भी श्रद्धांजलि बतौर उन्हें नम आंखों से याद किया गया।
तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के इतिहास के बारे में मैं जरूर याद दिलाना चाहूंगा राजेंद्र प्रसाद की बातों को, बताते चलें कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने भागलपुर वासियों को भागलपुर विश्वविद्यालय उपहार के रूप में दिया था, उनके बड़े भाई महेंद्र प्रसाद की पोती शारदा का विवाह जिले के मुक्तेश्वर प्रसाद के पुत्र श्याम जी प्रसाद के साथ हुई थी ब्रह्मदेव जमवार मुक्तेश्वर प्रसाद के करीबी साथी थे जो एक जस्टिस थे उन्होंने हंसी मजाक में ही राजेंद्र बाबू से उपहार की मांग कर दी और इस पर उन्होंने बिना हिचक के जस्टिस जमवार से पूछ लिया कि क्या चाहिए और उन्होंने तुरंत एक विश्वविद्यालय की मांग कर दी और जिसका जीता जागता नमूना अपना भागलपुर का तिलकामांझी विश्वविद्यालय है।
बताते चलें कि 14 अक्टूबर 1993 को भागलपुर विश्वविद्यालय के नाम में तिलकामांझी जोड़ा गया था। तिलकामांझी जो एक स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर इस विद्यालय का नाम रखा गया। बिहार सरकार की अधिसूचना के बाद इसका नाम तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय हो गया। इसमें डॉक्टर कृष्ण सहाय बिलग्रामी ज्योति ,स्वरूप दत्ता मुंशी हरिद्वार राय ,नित्यानंद मिश्र ,राधा कृष्ण चौधरी, चंद्रदेव सिंह ,पंचानंद मिश्र सुदर्शन प्रसाद सिंह ,आचार्य कपिल, शारदा देवी, वेदा अलंकार, रामजी प्रसाद सिंह को भुलाए नहीं भूला जा सकता। बताते चलें कि अपने इस विश्वविद्यालय में जाने-माने विश्व विख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने कुलपति का पद भी सुशोभित किया था, वह 1964 ईस्वी में कुलपति के पद पर आसीन रहे थे।
वहीं दूसरी और बताते चलें कि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय ने अपने स्थापना के 62वे वर्ष में कई विद्वान शिक्षक वैज्ञानिक और राजनेता दिए हैं जिनमें जगन्नाथ मिश्रा और भागवत झा जैसे मुख्यमंत्री तथा शिव चंद्र झा एवं सदानंद सिंह जैसे विधानसभा अध्यक्ष भी यही के छात्र हैं ।प्रोफ़ेसर दत्ता मुंशी और प्रोफेसर कृष्ण सहाय बिलग्रामी जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षक भी यही के छात्र रहे हैं साथ ही बताते चलें कि विश्वविद्यालय परिसर स्थित टिल्हा कोठी भी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि रविंद्र नाथ टैगोर के नाम पर रखा गया , कहा जाता है रविंद्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय में आए थे उन्हीं की याद में उनके नाम पर यह भवन का नाम रविंद्र भवन रखा गया। बताते चलें कि इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति डॉ ब्रह्मदेव प्रसाद जमुआर हुआ करते थे। पहले इस विश्वविद्यालय में कुल गीत और कुल ध्वज नहीं थे ।डॉ रामेश्वर रामाश्रय यादव के समय से यह कुलगीत और कुल ध्वज अपने विश्वविद्यालय को भी मिला।




