बिहुला विषहरी पूजा समिति ने मूर्तिपूजन व मेला लगने को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन!

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रिपोर्ट:-निभास मोदी

भागलपुर। बिहुला विषहरी महारानी पूजा समिति द्वारा अंग जनपदीय धरोहर की लोक आस्था पर आधारित बिहुला विषहरी मनसा महारानी पर्व को लेकर जिलाधिकारी भागलपुर के पास पूरी बिहुला विषहरी महारानी समिति की टीम पहुंची और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया कि अगर दुर्गा पूजा हो सकता है, काली पूजा हो सकता है तो फिर अंग जनपद की यह बहुत बड़ी पूजा बिहुला विषहरी पूजा क्यों नहीं हो सकती। कृपया इस पर्व को भी खुल कर करने का आदेश दिया जाए। बताते चलें कि अंग प्रदेश का क्षेत्र भागलपुर की धरती सती बिहुला विषहरी की आस्था से जुड़ी है । अंग जनपद का ये पर्व बिहुला विषहरी ( मनसा ) पूजा 17 अगस्त से 19 अगस्त तक प्रति वर्ष मुख्य रुप से आयोजन सदियों से होते चला आ रहा है । इसके एक माह पूर्व 16 जुलाई से ही बारी पूजा की शुरुआत के साथ ही मुर्ति निर्माण का कार्य शुरु हो जाता है । एक महीने तक विभिन्न स्थानों एवं अन्य स्थल पर विषहरी के गीत भजन प्रतिदिन होती है । 16 अगस्त के मध्य रात्रि में प्रतिमा स्थापित हो जाती है और 17 अगस्त को प्रातः से कुवांरी डलिया चढ़ावा होता है । इसी दिन बाला लखेन्द्र की बारात धूमधाम से विषहरी के स्थान के इर्द – गिर्द भ्रमण कराकर रात्रि में बाला लखेन्द्र और बिहुला की शादी का आयोजन होता है । 18 अगस्त को द्वितीय डलिया सभी विषहरी स्थान एवं भगत के स्थान पर चढ़ाते हैं एवं 18 को ही दोपहर बाद मंजूषा भगत विर्सजर्न विभिन्न घाटों पर किया जाता है । 19 अगस्त को प्रति वर्ष भागलपुर में विर्सजन शोभा यात्रा एवं मेला का आयोजन कर माँ विषहरी को विदाई दी जाती है । जिलाधिकारी को समिति के लोग यह भी बताते दिखे कि विगत वर्ष 2020 में कोरोना महामारी को देखते हुए प्रतिमा स्थापित नहीं हो सकी थी , ना ही कोई कार्यक्रम किया गया था । सिर्फ भक्तगण अपने – अपने घरों में पूजा कर औपचारिकता निभाए थे । डलिया चढ़ावा जो कि गरीब , मध्यम वर्गीय एवं अन्य परिवार का मन्नत रहता है प्रति वर्ष सुहाग को रक्षा परिवार सुखी संपन्न रहे इसके लिए डलिया चढाते है । विगत वर्ष जो परिवार डलिया नहीं चढाए थे उन्हें इस वर्ष दोगुना बढ़ाना होगा । डलिया बढ़ाने की छूट मिलनी चाहिए । 4 जुलाई को बिहुला विषहरी महारानी केन्द्रीय पूजा समिति द्वारा सभी विशहरी स्थान के मेंढपति एवं स्थानीय समिति के पदाधिकारी की बैठक भी की गई। जिस स्थान पर प्रतिमा बैठाई जाती है उस स्थान पर प्रतिमां बैठाने की अनुमति दी जाए । कोरोना गाइडलाइन का पालन स्थानीय समिति सुनिश्चित करेगी । भीड़ – भाड़ नहीं लगने दिया जाएगा । विसर्जन सिर्फ 20-21 कार्यकर्तागण कर लेंगे । शोभा यात्रा का आयोजन नहीं होगा । 17 एवं 18 अगस्त को विधहरी स्थानों में डलिया चढ़ाने का कार्य सोशल डिरटेंसिंग में कराएंगे या फिर कूपन नंबर देकर प्रसाद चढ़ाते हुए डलिया वापस किया जाएगा । सभी स्थानीय समिति अपना कार्यकर्ता इस हेतु तैयार रखेंगे । सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क , सनिटाइजर आवश्यक होगा। भगत एवं मंजुषा विसर्जन दूरी बनाकर चिन्हित घाटी में किया जाएगा । सीमित संख्या में ही भक्त रहेंगे । विगत वर्ष 2020 में विषहरी पूजा के बाद दुर्गा पूजा एवं काली पूजा का आयोजन किया गया । काली पूजा में विसर्जन शोभा यात्रा भी आयोजित हुई थी जो कि विषहरी पूजा के साथ सौतेला पूर्ण व्यवहार ना किया जाए। विषहरी पूजा समिति के लोगों का यह भी कहना हुआ कि अंग जनपद के इस महापर्व को इस वर्ष आयोजित करने की अनुमति दी जाए ।

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