लखीसराय-सुविख्यात मगही कवि मथुरा प्रसाद नवीन की मनाई गई 22वीं जयंती!

SHARE:

रिपोर्ट :- शशिकांत मिश्रा!

बड़हिया।
जीवंत कविता के महान रचनाकार तथा मगही के कबीर से विभूषित प्रख्यात कवि बड़हिया निवासी स्व.मथुरा प्रसाद नवीन की 22वीं पुण्यतिथि सोमवार को मथुरा प्रसाद नवीन चेतना समिति के तत्वावधान में समिति के वरीय सदस्य कृष्णमोहन सिंह के अध्यक्षता में उपस्थित सदस्य व ग्रामीणों ने सयुक्त रूप से नागवती स्थान स्थित कवि मथुरा प्रसाद नवीन के प्रतिमा पर फूल माला व पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दिया ।
इस मौके पर उपस्थित सदस्य ने सबोधित करते कहा कि जीवंत कविता के महान रचनाकार तथा मगही के कबीर से विभूषित प्रख्यात कवि बड़हिया निवासी स्व. मथुरा प्रसाद नवीन की कृतियां आज भी समाज के लिए प्रासंगिक है। बड़हिया रामचरण टोला में 14 जुलाई 1928 को जन्म लिए कविवर नवीन ने मगही भाषा का कबीर बनकर राजनीति, धर्म, राष्ट्रभक्ति, परंपराएं, रूढि़यों के साथ आज की व्यवस्था पर अपनी रचना से चोट करते हुए विषम परिस्थितियों में भी समाज को नई दिशा दी। उनकी रचनाओं पर दर्जनों साहित्यकारों ने पीएचडी और डी-लिट की उपाधि ली ।स्व. नवीन ने अपने गांव पर व्यंग करते हुए लिखा था ‘हमर गांव हो आला बबुआ, हमर गांव हो आला, बेटा हो बंदूक उठइले बाप जपो हो माला आदि रचना प्रेरणादायक है।उन्हें मगही के कबीर की उपाधि महान कवि नागार्जुन से प्राप्त हुई थी।नागार्जुन, गोपाल सिंह नेपाली, फनीश्वरनाथ रेणु, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, रामधारी सिंह दिनकर, महादेवी वर्मा सरीखे दर्जनों साहित्यकारों के चहेते कवि मथुरा प्रसाद नवीन जी ने यथार्थ के धरातल पर बेबाक टिप्पणी करने में माहिर होने के कारण जन कवि के रूप में ख्याति अर्जित की। साहित्य के माध्यम से समाज में परिवर्तन करने वाले समाज के लिए हर प्रकार की कुर्बानी देने को तैयार कवि नवीन ने समाज में जागृति पैदा करने के लिए सभी क्षेत्रों के लिए कविताएँ लिखीं थीं। नवीन जी ने इस पूरे क्षेत्र की पहचान साहित्य जगत में स्थापित कराया था।
इस मौके पर सौरव कुमार,रौशन अनुराग,अमित कुमार,,आकाश गुंजन, कमलेश कुमार, दिग्विजय कुमार,शशिकांत मिश्रा सहित कई सदस्य मौजूद थे।

Join us on:

Leave a Comment