रिपोर्ट – आशुतोष पांडेय
आरा। जैनाचार्य चर्याशिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज एवं आर्यिका रत्न श्री 105 विमलप्रभा माता जी के मंगल आशीर्वाद से श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर में दस दिवसीय नवरात्रि महोत्सव सह विश्व शांति महायज्ञ के आठवें दिन रविवार को अष्टमी तिथि के श्रृंगारकर्ता राजेश्वरी जैन अपने पूरे परिवार सहित भक्ति करते हुए मंदिर पहुंची। मंदिर में बड़े ही श्रद्धापूर्वक श्रीजी का पंचामृत अभिषेक, पूजन एवं महाशांतिधारा हुआ। अपराह्न समय में देवी ज्वालामालिनी मां का दिव्य आह्वान व आराधना हुआ। तत्पश्चात देवी मां का भव्य गोद भराई, श्रृंगार एवं प्रसाद वितरण हुआ। मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन ने बताया कि देवी ज्वालामालिनी मां का दिव्य दर्शन, आराधना करने के लिए सुबह से ही भक्तों की लग रही है भारी भीड़। सायंकालीन कार्यक्रम में रंग-बिरंगी दीपों से सजी आरती थाल से श्रीजी का, यक्ष जी, देवी मां एवं क्षेत्रपाल जी का मंगल आरती हुआ। तत्पश्चात भजन, शास्त्र प्रवचन, माता का झूला, रत्नों की वृष्टि एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, डांडिया हुआ। शास्त्र प्रवचन में डॉ अजीत जैन शास्त्री ने कहा जीवन में संस्कार का विशेष महत्व है यदि हम संस्कारशील नहीं रहेंगे तो आने वाली हमारी पीढियां संस्कारी कैसे रहेंगे। तथा उन्होंने कहा की शिशु के गर्भ काल से ही माता-पिता को अच्छे आचरण करना चाहिए तथा देव शास्त्र गुरु की पूजा भावपूर्वक करने से जन्म लेने वाला शिशु भी ओजस्वी और संस्कारी रहेगा। आयोजन को सफल बनाने में कोषाध्यक्ष धीरेन्द्र चंद्र जैन, संयोजक डॉ शशांक जैन, मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन, अजय कुमार जैन, रजत जैन, दीपू जैन, दीपक प्रकाश जैन, डॉ राकेंद्र कुमार जैन, सुशील जैन, मिथिलेश जैन, अभय जैन, मनीष जैन, रोहित जैन, साहू जैन, मृगांक जैन, धर्मराज जैन, चीनू जैन, डॉ नीलम जैन, रेशू जैन, गुंजन जैन, विनीता जैन, रश्मि जैन, ब्र सुलोचना जैन, वीर जैन, रौशन जैन, जिनवाणी जैन, रूपाली जैन, श्वेता जैन, श्रद्धा जैन, नेहा जैन, राशि जैन, साक्षी जैन, स्वर्णिका जैन, ओंकार अग्रवाल की भूमिका सक्रिय रहा।




