रिपोर्ट :अरविंद कुमार

जलजमाव व सड़क टूटने की वजह से लोगों का जिला और प्रखंड मुख्यालय से संपर्क हुआ भंग!किसानों द्वारा बोए गए बिछड़े गले, खेती की उम्मीद खत्म!

मोतिहारी।पूर्वी चम्पारण के बंजरिया प्रखंड में 10 दिनों से बाढ़ के पानी से के कई इलाके जलमग्न है। सरकारी नियमानुसार 72 घंटा पानी का जामव होने पर बाढ़ प्रभावित घोषित हो जाना चाहिय। परन्तु बंजरिया प्रखंड के 9 पंचायत में आज 10 वें दिन भी बाढ़ का पानी सैलाब जैसा है । परन्तु बाढ़ क्षेत्र 9 वा दिन कुछ ही गावों को घोषित किया गया.जहा प्रखण्ड कार्यालय समेत BSFC एवम अंचल कार्यालय PHC अस्पताल प्रत्येक साल की तरह बाढ़ से घिरा पड़ा है।जिले में भले ही गंडक एवं बूढी गंडक समेत लालबकेया नदी के पानी का प्रभाव अभी कम हो गया हो परन्तु बंजरिया प्रखंड होकर गुजरने वाली नदिया सिकरहना, तिलावे, बंगरी, दुधौरा के जल स्तर से प्रखंड क्षेत्र के अधिकांश भाग जलमग्न है आज भी

क्षेत्र की सभी नदियों सिकरहना, तिलावे, बंगरी, दुधौरा के जलस्तर मैं वृद्धि से मोखलिशपुर, गोबरी, जनेरवा, जटवा, बुढ़वा, सुखिडीह, चिचुरहिया, बेलाडीह, सुन्दरपुर, खैरी आदि गांवों का प्रखण्ड मुख्यालय व जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क भंग हो गया है। वही बुढ़वा-कुकुरजरी के बीच पक्की सड़क पर बीस फीट तक सड़क टूट गई है,साथ ही प्रखण्ड कार्यालय समेत BSFC एवम अंचल कार्यालय PHC अस्पताल प्रतेक साल की तरह बाढ़ से घिरा पड़ा है।जब प्रत्येक साल इन कार्यालय को बाढ़ से घिर जाता है तो सरकार समेत जिला प्रशासन पहले से क्यो नही बचाव का रास्ता ढूढा,सवाल उठता है कि बिगत बर्ष में हजारों क्विंटल BSFC गोदाम में अनाज में बाढ़ की पानी घुसा,भीग कर कर गया फिर भी प्रशासन की दु;साहस इसी गोदाम में अनाज का भंडारण बड़ा सवाल उठता है।
जिला मुख्यालय आने के लिए आप पैदल हो या वाहन साइकिल हो या दोपहिया,चारपहिया वाहनों के परिचालन में काफी परेशानी हो रही है।
ट्रेक्टर व नाव ही बना बंजरिया प्रखंड के लोगो के लिए सहारा।धान की रोपनी का समय था परन्तु बाढ़ ने तो धान की बिचड़ा इस कदर डुबाया कि धान फसल की आस छोड़ बैठ गये किसान ।
युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष बिट्टू यादव ने जिला प्रशासन पर आरोप लगया कि बंजरिया प्रखंड नरकटिया विधानसभा में है जहा से राजद विधायक है जिस कारण इस प्रखंड के 9 पंचायत कई दिनों से पानी से घिरे होने के बाबजूद बाढ़ प्रभावित घोषित न हुआ। साथ ही सरकारी स्तर पे न तो नाव और न ही कम्युनिटी किचेन की व्यवस्था की गई।वहीं अस्पताल पानी घिरा पड़ा है।




