पंकज कुमार जहानाबाद ।
टिड्डी प्रकोप एवं प्रबंधन
विगत वर्षों में देश के पश्रिमोत्तर प्रांत यथा राजस्थान, हरियाणा, गुजरात में टिड्डी दल का प्रकोप होता रहा है। इसके प्रकोप से फसलों एवं पेड़-पौधों को काफी नुकसान होता है। वर्ष 2020 में टिड्डी दल का आक्रमण बिहार के कुछ जिलों में हुआ था। टिड्डी दल अपने मार्ग में आने वाले हरे पेड़-पौधे, शाक-सब्जियों एवं फसलों को खाकर भयंकर क्षति पहुँचाते है।
अतः इस कीट के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है।
(।) टिड्डी का पहचान:-
टिड्डी का शरीर 5 से 8 सेमी तक लम्बा, सँकरा व बेलनाकार-सा होता है। इसका शरीर हरे, पीले या भूरे रंग का होता है। इनका शरीर सिर, वक्ष एवं उदर भागों में विभेदित होता है।
(ठ) अवस्था:-
टिड्डी के जीवन चक्र की तीन अवस्थाएँ होती है-
1- अण्डा, 2- शिशु टिड्डी एवं 3-वयस्क टिड्डी
- अण्डा:- टिड्डियाँ अपने ओविपोजिटर (Ovipositor)को जमीन में घुसाकर 6 इंच गहराई पर नम मिट्टी वाली भूमि में झुण्डों में अण्डे देती है। समुहशील मादा टिड्डी दल 2-3 अण्डगुच्छे देते है, जिनमें प्रत्येक में 60 से 80 अण्डे होते है। 10-12 दिन में अण्डे समूह में शिशु टिड्डी निकलती है। जिस जगह अण्डे दिए गए है, वहाँ सुराख दिखाई देते है, जिसके मुहँ पर सफेद झाग नजर आते हैं। तापमान के अनुसार लगभग 12 से 14 दिन पश्चात् अण्डे से नवजात शिशु निकलते रहते है।
- शिशु टिड्डी:- अण्डों से निकलने के बाद पंखहीन सफेद शिशु टिड्डी दल वनस्पतियों, पेड-पौधों की तलाश में जमीन की सतह से चलने लगते है। इसके तुरन्त बाद वे काले रंग के हो जाते हैं और बाद में उनके शरीर की आकृति पीले रंग की विकसित होने लगती है। वयस्क होने के पहले शिशु टिड्डी दलों को पाँच उप अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है।
- वयस्क टिड्डी:- काली आकृति के साथ उम्रदार टिड्डी चमकीले पीले रंग की हो जाती है। समूहशील टिड्डी 30 दिन में वयस्क हो जाती है। वयस्क टिड्डी दल परिपक्वता की स्थिति में तभी पहुँच पाते हैं, जब उन्हें प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ मिलती है। सामान्यतः अण्डे देने की प्रक्रिया मैथुन के बाद दो दिन के अन्दर आरम्भ होती है। टिड्डी नियंत्रण के लिए टिड्डी दलों की खोज और उनकी पहचान से संबंधित जानकारी समय पर मिलना आवश्यक है। टिड्डियों के दल दिन के समय सूरज की चमकीली रोशनी में तेज उड़ाका झुण्डों के रूप में उड़ते रहते है। शाम के समय वे झाड़ियों व पेडों पर आराम करने के लिए नीचे उतर आते हैं और अगले दिन अपने बसेरों से उड़ना शुरू करने से पहले वहीं रात गुजारते हैं।
(ब्) नियंत्रण:-
टिड्डी के आक्रमण होने पर नियंत्रण हेतु निम्न प्रक्रिया अपनायी जानी चाहिए- - टिड्डियों के नियंत्रण की कार्रवाई युद्ध स्तर पर की जाय।
- बिहार राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्रों से सहयोग लिया जाय।
- कृषि विभाग द्वारा प्रमण्डल स्तर, जिला स्तर, प्रखंड स्तर एवं पंचायत स्तर पर टिड्डी नियंत्रण हेतु विभिन्न समितियों का गठन किया गया। इसके लिए अलग से निर्देश जारी किए गए है।
- टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना कृषि विभाग के सभी स्तर के पदाधिकारियों/कर्मियों के साथ-साथ पंचायत स्तर पर कृषकों तक तत्काल पहुँचाया जाना चाहिए।
- टिड्डी दल के प्रकोप की दशा में एक साथ इकट्टा होकर ढोल, नगाडों, टीन के डिब्बों, थालियों आदि को बजाते हुए शोर मचाएँ। शोर से टिड्डी दल आस-पास के खेतों में आक्रमण नहीं कर पायेंगे।
- सम्भावित प्रभावित क्षेत्रों के लिए कृषि रक्षा रसायनों, स्प्रेयर्स, ट्रैक्टर्स, अग्निशमन वाहन आदि की व्यवस्था कर ली जाए।
- जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाय तथा माॅक ड्रिल के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है।
- टिड्डी दल प्रायः दिन डूबने के समय किसी न किसी पेड़/पौधों पर दिन निकलने तक आश्रय लेती है। सघन सर्वेक्षण द्वारा आश्रय के स्थान को चिन्हित किया जाना चाहिए।
- ट्रैैक्टर माउण्टेड स्प्रेयर्स, ट्रैक्टर्स, अग्नि शमन विभाग की गाड़ियों, पीपीई कीट, मानव संसाधन आदि की तत्काल उपलब्धता होनी चाहिए।
- अनुशंसित रसायन की छिड़काव के लिए सबसे उपर्युक्त समय रात से सुर्योदय तक होता है। अतः छिड़काव इसी अवधि के दौरान किये जाने की प्रभावी रणनीति जिला स्तर पर बनाकर कार्यवाही की जानी चाहिए।
- यदि टिड्डी दल का प्रवेश का प्रेवश बिहार में होता है एवं फसलों पर प्रकोप ज्योंहीं दिखाई पड़े तो त्वरित रूप से किसानों के द्वारा अपने फसलों पर निम्नलिखित कीटनाशइयों का छिड़काव किया जा सकता है।
लैम्डासायहैलोथ्रीन 5%ई0सी0 की 1.0 मिली0 मात्रा प्रति लीटर पानी में या,
क्लोरपायरीफाॅस 20% ई0सी0 की 2.5 से 3.0 मिली0 मात्रा प्रति लीटर पानी में या,
फिप्रोनिल 5%एस0 सी0 की 1.0 मिली0 मात्रा प्रति लीटर पानी में या, डेल्टामेथ्रीन 2.8%ई0सी0 की 1.0 से 1.5 मिली0 मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। - आक्रमण की अवस्था में राज्य स्तर पर संयुक्त निदेशक, पौधा संरक्षण, बिहार, पटना, उप निदेशक, पौधा सरंक्षण, सर्वेलेन्स एवं आई0पी0एम0, बिहार, पटना एवं सहायक कृषि निदेशक, सर्वेलेन्स (मु0), पटना एवं प्रमण्डल स्तर पर प्रमण्डलीय संयुक्त निदेशक एवं उप निदेशक, पौधा संरक्षण तथा जिला स्तर पर जिला कृषि पदाधिकारी एवं सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण से सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसान काॅल सेन्टर के टाॅल फ्री नं0-18001801551 पर सम्पर्क किया जा सकता है।




