रवि शंकर शर्मा!
॥ चल रे दीवार॥ ॥ चल रे दीवार॥
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सत्यम की थाल में, शिवम् की वर्तिका जलाकर, सुन्दरम् की आरती उतारने वाले जाज्वल्यमान नक्षत्र में धानुक समुदाय के कुल देवता संत सिरोमणी श्री श्री १०८ श्री शरण निवास बाबा महतो साहब जी का !! “चल रे दीवार”!! से महान गाथा का प्रारंभ पटना जिला के मुहाने नदी के मठ घाट के तट पर अवस्थित कुर्मीचक
ग्राम की पावन धरा पर प्रादुर्भाव हुआ।

जिन्होंने अपने मित्र मखदूम साहब के आने की सूचना पाकर जिस दीवार पर बैठकर सन काट रहे थे, उसी दीवार को अपनी दिव्य शक्ति से अपनी सवारी बनाकर आकाश मार्ग में उड़ा कर अपने मित्र से मिलने चले गए। बाबा महतो साहब उच्च कोटि के समाज सुधारक, पराक्रमी, तेजस्वी एवं प्रतिभावान ईश्वर भक्त थे, जिन्होंने हिंदू – मुस्लिम एकता का मिशाल परिचय दिया। जहाँ – जहाँ बाबा महतो साहब जी का पूजा होता है, वहाँ – वहाँ बाबा मखदूम साहब जी का भी पूजा होता है। और जहाँ – जहाँ बाबा मखदूम साहब जी का पूजा होता है, वहाँ – वहाँ
बाबा महतो साहब जी का भी पूजा होता है।

ये दोनों घनिष्ठ मित्र थे। उदाहरण के तौर पर नालंदा जिले के बिहारशरीफ में मणीराम के अखाड़ा के दीवार पर वर्णित लेख में एक तरफ शेर पर सवार हाथ में सर्प का चाबुक लिए मखदूम साहब जी तो दूसरी तरफ से बाबा महतो साहब जी दीवार का सवारी करते प्रतीत होते हैं। इस दीवार पर यह भी अंकित है कि यहाँ॥ दो महापुरुषों का मिलन॥ कुर्मीचक ग्राम के पावन धरा पर प्रत्येक विषम संख्या वर्ष के वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन मेला महोत्सव बड़ी धूम – धाम से मनाया जाता है। जिसमें बड़ी संख्या में पटना जिला के अलावे नालंदा, शेखपुरा, लक्खीसराय तथा बेगुसराय जिला से श्रद्धालु बाबा महतो साहब जी के दर्शनार्थ पूजा अर्चना करते हैं तथा मेला का आनंद उठाते हैं।




