ईश्वर के प्रति सर्वस्व समर्पण ही कल्याण का एकमात्र मार्ग – आचार्य गुप्तेश्वर पांडेय!

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पंकज कुमार जहानाबाद।

चौथे दिन अपने रामकथा में आचार्य गुप्तेश्वर महाराज जी ने उपस्थित जन समुह से कहा ,भगवान् के प्रति सर्वतोभावने आत्मसमर्पण ,आत्मनिवेदन ही कल्याण का एकमात्र मार्ग हैं

जहानाबाद (गांधी मैदान )
रामायण मंदिर के समीप गांधी मैदान, जहानाबाद में रामकथा वाचक आचार्य श्री गुप्तेश्वर जी महाराज ने कथा के चौथे दिन दशरथ सुत के रूप में भगवान राम के अवतरण की भक्तिमय व्याख्या की।व्याख्या के प्रवाह में रामकथा के हजारों प्रेमी जन प्रवाहमय दिखे।भगवान राम का जन्म और जन्मोप्रांत अयोध्यापति दशरथ के निज निकेत में होनेवाले उत्सव का संगीतमय शैली में आचार्य श्री ने अदभुत वर्णन किया।सुधि श्रोता अपना सुध बुध खोकर नाचते, गाते नजर आए।
आज अपने प्रवचन के दौरान मुख्यतः आचार्य जी ने भगवान के अवतार के कारणों,रामचरितमानस की वैज्ञानिकता,जीव,जगत की समस्याओं का कारण और निदान आदि लोकाहितकारी विषयों को व्याख्या के केंद्र में रखा।’रचि महेश निज मानस राखा।पाइ सुसमऊ शिव मानस राखा’से कथा की शुरुआत की।

उन्होंने कहा कि मां पार्वती के आग्रह पर भगवान् शिव के मुख से राम कथा का सृजन सांसारिक समस्याओं के समाधान के लिए हुआ है। मां पार्वती के आग्रह का यह आशय जानकर ही जीव और जगत के कल्याणार्थ भगवान् शिव ने यह कथा कही और तुलसी बाबा ने लिखा। यही रामचरितमानस की वैज्ञानिकता है। रामचरितमानस की वैज्ञानिकता इस बात में है कि यह ग्रंथ राम के चरित्र का ऐसा मानसरोवर है, जिसमें स्नान कर संसार सभी प्रकार के कष्टों से मुक्त हो जाता है।इस क्रम में आचार्य जी ने मानस की निम्नलिखित पंक्तियों को उद्धृत करते हुए कहा,
‘बिनु पद चलै सुनै बिनु काना।कर बिनु करम करै बिधि नाना।
आनन रहित सकल रस भोगी।बिनु बानी बकता बड़ जोगी।।यह है, रामकथा की वैज्ञानिकता। रामचरितमानस भक्ति मार्ग का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है।मानस का विज्ञान का कहता है कि भगवान् के प्रति सर्वतोभावेन आत्मसमर्पण,आत्मनिवेदन ही भगवान् के शरणागत हो भक्त चिंतामुक्त हो जाता है। विस्तार से आचार्य जी ने भगवान् के शरणागति होने की विधियां बताई।एक शरणागत को भगवान् के अनुरूप रहने का संकल्प,उनकी प्रतिकूलता का त्याग,रक्षक भगवान् में विश्वास,रक्षक भगवान् का वरण,आत्म-समर्पण और दैन्य भाव सभी प्रकार के कष्टों के निवारण और मुक्ति का मार्ग है।इस बात को आचार्य जी ने पूरी दृढ़ता से कहा। भगवद् भक्ति के भावों की चर्चा करते हुए कहा कि स्तुति,दास्य भाव,बन्धुभाव और प्रबल प्रेम से प्रभु की फलदाई अवश्य होती है।
चौथे दिन कथा का समापन आचार्य श्री गुप्तेश्वर जी महाराज ने ये सारी सारगर्भित बातें रखीं। हजारों नर-नारी मंत्रमुग्ध हो कथा का श्रवण करते दिखे।
इस अवसर चौथे दिन भी मंच का पूजन स्वामी राकेश जी महाराज ने किया पुजन पंडीत अशोक जी महाराज ने कराया ।इस अवसर संतोष श्रीवास्तव , मार्कण्डेय कुमार आजाद , अजीत शर्मा , डा वीरेन्द्र कुमार सिंह ,राजकिशोर शर्मा ,शैलेश कुमार ,शिक्षाविद डा अभिराम शर्मा ,डा एसके सुनील , ,लोजपा नेत्री डा इन्दु कश्यप , जिला विधिक संध के अध्यक्ष गिरजानँदन सिह , अपर लोक अभियोजक सुधीर कुमार ,सुबोध कुमार उपस्थित थे ।

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