20 घंटे तक घर में पति का पड़ा था शव, पत्नी और बच्चों का रो – रो कर हुआ बुरा हाल !

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धर्मेंद्र पांडे

पत्नी समाज और प्रशासन से लगाती रही गुहार, लेकिन कोई नहीं आया मदद को आगे!

मुहल्ले के हर घर का दरवाजा खिड़की रहा बंद!

कोरोना के इस कालखंड में जहां अपनों से, अपने मुंह मोड़ रहे हैं।

आखिरकार 20 घंटे के बाद समाजसेवी नवीन सिन्हा के प्रयास से जागा प्रशासन , किसी तरह चार लोग जुट कर शव को सील कर दो मंजिले घर से उतारा नीचे, किया अंतिम संस्कार …

कोरोना संक्रमण की मार से जहां मानवता के ज्यादातर कठोर उदाहरण सामने आ रहे है वही जब लाचार पत्नी के सामने 20 घन्टे से पड़े पति के शव के अन्तिम यात्रा के लिए कुछ मानवीय चेहरा भी उदाहरण पेश करती दिख रही है ।

कोरोना काल में हर रोज एक दर्दनाक घटना सामने आ रही है। दरभंगा शहर में भी हर दिन कोरोना संक्रमितों की मौत हो रही है। ऐसे में मौत के बाद रिश्तेदार से लेकर आस परोस एवं पड़ोसी सब मुंह मोड़ रहे है। ऐसे में एक परिवार का दर्द समझा जा सकता है जहां पत्नी के सामने ही उसके 45 वर्षीय पति की मौत हो जाये और 20 घंटे तक उसका शव घर के अंदर बेडरूम में हो तो घर के लोगो का हाल समझा जा सकता है । वो भी घर में सिर्फ पत्नी और तीन छोटे छोटे बच्चे । मजबूर और असहाय पत्नी बार बार लोगो से मदद मांगती रही, रोती , चिल्लाते रही लेकिन कोइ हाथ मदद के लिए आगे नही आया। यहाँ तक की जब प्रशासन तक खबर पहुंचा तो प्रशासन के वरीय पदाधिकारी भी असहज दिखे।

पूरा मामला नगर थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 27 के गंगासागर मुहल्ले की है जहां किराये के दो मंजिला मकान में कोरोना से संक्रमित हो कर 45 वर्षीय व्यवसायी अपने घर में ही आइसोलेशन में थे। घर में ही वो रह कर अपना इलाज कर स्वयं को ठीक करने में जुटे थे। लेकिन शायद ऊपर वाले को ये मंजूर न था और 23 तारीख को उनकी मौत हो गई। जिसके बाद उनके तीन बच्चे और पत्नी घर में थे और उनके सामने मृत पड़े उनके घर के मुखिया। जिसके बाद परिवार का रो रो कर बुरा हाल था। लगातार वो आस पड़ोस के साथ जिला प्रशासन से शव के अंतिम संस्कार के लिए गुहार लगा रही थी। लेकिन 20 घंटे बीत जाने के बावजूद भी उनका साथ देने कोई नहीं आया।

अंत में जब इस ह्रदय विदारक घटना की सुचना समाजसेवी नविन सिन्हा तक पहुंचा तो उन्होंने परिवार को मदद पहुंचाने को लेकर प्रयास शुरू किया जिसके बाद जिला प्रशासन के साथ नगर आयुक्त से सम्पर्क साधा। सबसे बड़ी समस्या शव दो मंजिला पर था और घर में कोई पुरुष सदस्य भी नहीं था। आखिरकार 20 घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग से एक कर्मी शव सेनिटाइज करने पहुंचा । इसके उपरांत मृतक के एक मात्र रिश्तेदार , मकान मालिक और समाजसेवी नवीन सिन्हा साथ में राजू राम ने शव को दो मंजिला मकान से उतारकर एम्बुलेंस में रखा। इस दौरान अगल बगल के सभी घरों का दरवाजा बंद रहा कोई मदद को आगे नहीं आया। वही इनलोगों ने समाज के सामने मानवता का मिशाल प्रस्तूत करते हुए उनका अंतिम संस्कार किया ।

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