डिप्थीरिया गलघोंटू एवं सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी!

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कैमूर/भभुआ(ब्रजेश दुबे):

डिप्थीरिया या आम भाषा में गलघोंटू एवं सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। 5 साल से कम उम्र के शिशु रोग प्रतिरोधक शक्ति कम होने से आसानी से इस रोग की चपेट में आ सकता है। इससे बचाव के लिए जन्म के बाद शिशुओं को डीपीटी (डिप्थीरिया-परटुसिस- टेटनस) का टीका आवश्यक है। सदर अस्पताल के चिकित्सक बताते हैं कि गलाघोंटू ‘कोरनीबैक्टीरियम डिप्थेरी’ जीवाणु से फैलने वाला रोग है। इसके संक्रमण से बच्चों के गले, नाक और स्वर यंत्र (सांस नाली का ऊपरी हिस्सा )में सूजन आ जाती है। जिससे उन्हें सांस लेने या बात करने में दर्द और कठिनाई होती है। यहाँ तक कि हृदय और आंख भी इससे बिना प्रभावित हुये नहीं रहते हैं। यदि शिशु को कमजोरी, गले में दर्द या खराश , भूख नहीं लगना या खाना निगलने में तकलीफ़ होना,गले के दोनों तरफ टॉन्सिल फूल जाना, जैसे लक्षण दिखे तो बिना देर किए चिकित्सक के संपर्क करें क्योंकि लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए प्रत्येक अभिभावक जागरूक होकर अपने शिशुओं को डेढ़,ढाई और साढ़े तीन महीने पर डीपीटी के तथा 18 महीने और 5 वर्ष की उम्र में बूस्टर की डोज़ जरूर दिलवाएँ। सम्पूर्ण टीकाकरण चार्ट के अनुसार सभी टीके दिलवाकर शिशु संबन्धित रोगों को पूर्ण रूप से खत्म करने में प्रशासन की मदद करें।

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