रूपेश कुमार की रिपोर्ट
औरंगाबाद भले ही सरकार द्वारा धान अधिप्राप्ति को लेकर 15 नवंबर से तिथि का निर्धारण की गई है और दो लाख सात हजार मीट्रिक टन धान की खरीदारी का लक्ष्य रखा गया है मगर जमीनी हकीकत कुछ और हि है धन की खरीदारी पैक्स अध्यक्षों के द्वारा नही की जा रही है। ऐसे में वैसे किसान जिनका धान की कटनी हो गई है वैसे किसान अपने धाम को बाजार में ओने पौने दामों पर बेचने को मजबूर है कर रहे हैं

किसानों का कहना है कि किसी तरह से फसल उगाई तो की गई है मगर पैक्स अध्यक्षों के द्वारा धानकाफी मायूस हैं वैसे मैं किसान का धान खेत और खलिहान में पड़े हुए है।अभी लगन का समय है और कितने किसान बच्चियों की शादी को लेकर परेशान है।सरकार के द्वारा जिन पैक्स अध्यक्षों को इसकी जिम्मेवारी दी गई थी पैक्स अध्यक्ष कौन है अपनी समस्या बताते हुए धान खरीदने से इंकार कर रहे हैं

जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने बताया कि जिले में कई जगह धान की रोपनी देर से हुई थी और कटनी भी अभी नही हो रही है।लेकिन जहां कटनी हो रही है वहां अधिप्राप्ति की जा रही है और जो पैक्स धान नही खरीद रहे है उन्हे खरीदने को कहा गया है और इसको लेकर टास्क फोर्स की बैठक भी की जा चुकी है।इधर सरकार और पैक्स के बीच खींचतान से किसान परेशान है और उन्हें अपने धान को सस्ते दरों और बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है जबकि सरकार ने धान की बिक्री दर 2040 रुपया निर्धारित कर रखा है। बाइट 1 शशि प्रजापति किसान बाइट 2 अश्वनी कुमार सिंह किसान बाइट 3 सौरभ जोरवाल डीएम औरंगाबाद




