धर्म के साथ कर्म करने से ही राष्ट्र को प्राप्त होगा परम वैभव : भागवत!

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बक्सर से धीरज कुमार की रिपोर्ट..

  • सनातन संस्कृति समागम में पहुंचे थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख मोहन भागवत
  • कार्यक्रम में संतों की वाणी को श्रोताओं ने किया आत्मसात

बक्सर : बक्सर के अहिल्या धाम में आयोजित सनातन संस्कृति समागम में आयोजित धर्म सम्मेलन पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हम सभी को अपने लक्ष्य हेतु कर्म करना पड़ेगा. कष्ट सहना पड़ेगा. तब जाकर राष्ट्र परम वैभव को प्राप्त करेगा. मन में राम रखो, जप करो, कर्म करो, धर्म करो, जैसे किसान कर्म करता है तो ही सभी का भला होता है. उन्होंने कहा कि संत दूसरे के लिए कार्य करते हैं. उनके मन में अपने लिए कुछ भी नही रहता है. इसीलिए संतो की इच्छा और वाणी का सम्मान ईश्वर भी रखते हैं और कहा भी गया है कि होइहे वही जो राम रची राखा. हालांकि इसके लिए कर्म और पुरुषार्थ करने की आवश्यकता है.
दरअसल, आरएसएस के वक्तव्य के पूर्व संत सम्मेलन के दौरान संतो ने कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में जिस प्रकार धारा 370 हटाई गई, राम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ उसी प्रकार पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में मिलाने के साथ ही यह भी लक्ष्य रखा जाए कि रामराज्य के समय जिस प्रकार भारत अखंड था उसी प्रकार का अखंड भारत फिर से बन जाए. इसी के जवाब में आरएसएस प्रमुख ने कहा कि इच्छा पूरी करने के लिए कर्म करना पड़ता है. पुरुषार्थ और त्याग करना पड़ता है. श्री राम ने अपने जीवन में ये सभी कार्य किए हैं. वह भगवान विष्णु के अवतार थे. चाहते तो एक क्षण में रावण की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे. मगर समाज को संदेश देने के उद्देश्य से श्री राम ने अपने सभी सुखों का त्याग की किया. सभी लोगो को आगे करने का कार्य किया. उनके साथ सभी को कर्म करना पड़ा. कष्ट सहना पड़ा तब जाकर इस धरती को रावण जैसे कई दुष्टों से मुक्ति मिली.

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