रवि शंकर शर्मा की रिपोर्ट :-
चार दिवसीय छठ महापर्व के दूसरे दिन शनिवार की संध्या हर्ष उल्लास और भक्तिभाव के साथ खरना सम्पन्न हुआ,
पूर्ण पवित्रता और सात्विकता से तैयार किये गये प्रसाद से भगवान भास्कर का नियम पूर्वक भोग लगाकर, उनका आह्वान करते हुए व्रती छठी मईया का ध्यान करती हैं तथा दरवाजा बंद कर खुद भी प्रसाद ग्रहण करती हैं,और इस दौरान, घर की महिलायें छठ की पारम्परिक गीत गाकर छठ मईया की आराधना करती रहती हैं. दरवाजा खुलने के बाद तमाम लोग छठ मईया और व्रती से आशीर्वाद प्राप्त कर फिर प्रसाद ग्रहण करते हैं, इसी प्रसाद के बाद व्रतियों का शुरू होता है 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास, जो उदीयमान सूर्य को अर्ध्य देने के बाद समाप्त होता है.
खरना के बाद महिलायें, सारी रात प्रसाद तैयार करती हैं और संध्या अर्ध्य का इंतजार!




