अमित कुमार की रिपोर्ट
भगवान भास्कर की आराधना के लिए किया जाने वाल चार दिवसीय छठ महापर्व नहाय खाय यानी कद्दू भात आथ से शुरू हो गया. नहाय खाय को लेकर पटना में लाखों छठ व्रतियों ने गंगा स्नान कर पूजा सामग्रियों सहित प्रसाद में प्रयोग होने वाले विभिन्न तरह के फल सब्जी और अनाजों को शुद्ध करने से जुड़े कर्मकांड को पूरा किया.गंगा स्नान के बाद व्रती महिलाओं ने एक-दूसरे की मांग में सिदूर लगाया। गंगा स्नान के बाद व्रती गंगा जल लेकर अपने घरों के लिए रवाना हुयी. इस गंगा जल का प्रयोग भगवान भास्कर के पूजा में प्रयोग होने वाले विभिन्न तरह के प्रसाद बनाने सहित अन्य कार्यों में प्रयोग किया जाता है, गंगा स्नान के लिए कष्टहरणी गंगा घाट पर सर्वाधिक भीड़ नजर आई. इनमें पटना जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारी करते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बंदोबस्ती और मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की गई साथी गंगा के सभी घाटों पर एनडीआरएफ की टीम सहित सीसीटीवी से पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना होने पर तुरंत राहत एवं बचाव कार्य किए जा सकें।
इस पूजा में भगवान सूर्य और छठी माता की विधि विधान के साथ पूजा उपासना की जाती है जिसमें महिलाएं और पुरुष 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास रखते हैं. कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि को पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है.यही हमने कुछ छठ व्रतियों से बातें की और इस भगवान भास्कर की महापर्व छठ के महात्मा और इससे जुड़े विषय को जानने का प्रयास किया




