कृषि वैज्ञानिकों ने भागलपुर के कतरनी धान का किया निरिक्षण!

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निलांबुज कुमार झा की रिपोर्ट —

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के वैज्ञानिकों द्वारा जगदीशपुर के कतरनी धान की फसलों का किया गया निरिक्षण

सैकड़ो एकङ के फसलों में गंभीर रूप से फंगस का आक्रमण

जगदीशपुर/भागलपुर:- जगदीशपुर में कतरनी धान की फसलों में पीलापन के साथ-साथ पौधा का सुखना व पौधे में वृद्धि की कमी को हुए कतरनी उत्पादक किसानों के फसल का सबौर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के द्वारा निरिक्षण किया गया। फसल का निरिक्षण, उपचार एवं परामर्श हेतु जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निर्देशक आत्मा भागलपुर के तत्वाधान में बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के वैज्ञानिकों एवं तकनीकी टीम के द्वारा खेतों में भ्रमण किया। किसानों के लगभग 100 एकङ आच्छादित फसलों का निरिक्षण किया गया। साथ ही लैब जांच हेतु कई खेतों के फसल का सैम्पल भी लिया गया। वैज्ञानिकों के द्वारा बताया गया कि आच्छादित फसल बिना बीज उपचार के किसानों द्वारा लगाया गया हैं, इसके रोकथाम के लिए सबसे पहलें अगले 15-20 दिनों तक खेतों में यूरिया का प्रयोग नही करना हैं, फंगीसाइड का प्रयोग 15 दिनों के अंतराल पर दो बार खेतों में छिड़काव करना हैं।

वैज्ञानिक कौन है दवाई के नाम व मात्रा भी बताए प्रोपिकोनाज़ोल- एक एम॰एल॰/ प्रति लीटर, डाइसाइक्लाज़ोल+ मैनकोजेब- दो ग्राम/प्रति लीटर, जिंक हुमेट व जिंक फुलवेट व एद्ता जिंक- 5 एम॰एल॰/ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना हैं। छिड़काव के दस दिनों में उचित सुधार नही होनें पर कृषि वैज्ञानिक से परामर्श लें।
फसलों का निरिक्षण कृषि विश्वविद्यालय सबौर के वैज्ञानिक डा॰ एस॰ एन॰ रॉय, डा॰ सुनील कुमार, डा॰ शंभू प्रसाद व डा॰ निवास रागवन ए॰ के द्वारा की गई। साथ ही आत्मा भागलपुर के उप परियोजना निर्देशक प्रभात कुमार सिंह, जगदीशपुर प्रखंड कृषि पदाधिकारी अभिषेक कुमार, सहायक तकनीकी प्रबंधक, किसान सलाहकार रंजन कुमार, अंगप्रदेश उत्थान एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड के निर्देशक रमण कुमार उपस्थित रहें।

फसलों के जांच के क्षेत्रभ्रमण के दौरान पिंटू यादव, भवेश यादव, दयानंद यादव, विकाश तांती, अवधेश कुमार संगी, देवेन्द्र यादव, रंजीत यादव, दुलेश्वर तांती, सुरेश तांती एवं अन्य किसान भी मौजूद थे।

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