सहारा कर्मियों की ओर से किया जा रहा है प्रायोजित प्रदर्शन

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सचिन केजरीवाल की रिपोर्ट

अपनी गलतियों के लिए सहारा बना रहा है सेबी को जिम्मेदार,निवेशक परेशान

साहिबगंज

देश भर में 5 हजार से ज्यादा शाखाओं, 12 लाख से ज्यादा अभिकर्ताओं वाली सहारा इंडिया अब अपने करोड़ों निवेशकों को बर्बाद करने पर तुली है, और इसकी जिम्मेदारी सेबी पर लाद दी गई है| आज निवेशक अपना पैसा मांगने जिस किसी के पास भी जाते हैं तो उन्हे उनके पैसों के बदले सेबी का हवाला देकर कहा जाता है कि सेबी से पैसा मिलते ही वापस किया जाएगा। सोचिए अगर सेबी पैसों को किसी कारण से वापस नही करती है तो निवेशकों का पैसा डूब गया न, जबकि इस पैसे को लौटाने की जिम्मेदारी सहारा की है न की सेबी की|क्योंकि निवेशकों ने अपना पैसा सहारा को दिया है न की सेबी को और निवेशकों से निवेश करवाने के बाद उस पैसा का क्या और कैसे उपयोग सहारा करता है इस बात से निवेशकों का कोई लेना देना नही है| निवेशकों को समय पर भुगतान चाहिए होता है, जिसमे सहारा विफल दिख रहा है| जिसकी वजह से कई बच्चियों की शादियां टूट गई, तो कई बीमार माएं पैसों के अभाव में बीमारी की वजह से काल के गाल में समा गई, मगर निवेशकों को भुगतान नही हुआ| इतना ही नहीं देश भर में आए दिन कोई न कोई सहारा एजेंट भुगतान नही किए जाने की वजह से परेशान हो कर आत्महत्या भी कर रहा है।सहारा ने निवेशकों को और अपने कार्यकर्ताओं का ध्यान बड़ी आसानी से सेबी की तरफ मोड़ दिया है ये कहते हुए की उनका पैसा सहारा सेबी खाते में पड़ा है, और सहारा के पास जो संपत्ति है जिसका दावा समूह से जुड़ा हर व्यक्ति करता है कि निवेशकों को लौटाई जाने वाली रकम से तीन गुना संपत्ति समूह के पास है| बेचने पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है, ये भी सहारा से जुड़े व्यक्तियों का ही कहना है| अगर संपत्ति को बेचा जाता है तो उससे आने वाला पैसा भी सेबी को चला जाएगा| क्योंकि सहारा समूह की सभी संपत्तियों पर एमबार्गों लगा हुआ है। ऐसे में जब तक सहारा सेबी विवाद समाप्त नहीं होता है तब तक निवेशकों को उनका भुगतान मिलने की कोई उम्मीद नहीं है, हां कुछ मामलों में उपभोक्ता फोरम ने सहारा के निवेशकों का भुगतान अवश्य करवाया है, मगर सहारा के ज्यादातर निवेशक छोटे हैं जिनको इतनी समझ नही है जिसकी वजह से वो उपभोक्ता फोरम का दरवाजा नहीं खटखटा सकते और उनको भुगतान भी नही किया जा रहा है। इसी क्रम में साहिबगंज में भी सहारा के निवेशकों ने अपने भुगतान को ले कर विकास चौधरी की अध्यक्षता में एक कमिटी का गठन किया है, और अपने भुगतान को ले कर लड़ाई लड़ रहे हैं, बता दे की जिले में भी सहारा द्वारा निवेशकों के जमा धन का भुगतान नही किए जाने की वजह से नाराज निवेशकों ने इस कमिटी का गठन किया है, और कमिटी ने इस संबंध में जिले के उपायुक्त समेत अन्य वरीय पदाधिकारियों और प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमे उन्होंने दरखास्त की है कि मामले को संज्ञान में लेते हुए निवेशकों का भुगतान करवाने की दिशा में पहल को जाए। इधर समूह के अभिकर्ता सेबी के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर सहारा सेबी खाते में जमा धन की मांग कर रहे हैं, मगर कुछ लोगों को लगता है की ये सब एक प्रायोजित कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है ताकि निवेशकों का ध्यान सहारा से हट कर पूरी तरह से सेबी पर केंद्रित हो सके।

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