:- रवि शंकर शर्मा (अमित)
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के 82 वें वार्षिक समारोह का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ
मुख्य बिंदु :-
बिहार में उद्योगों का विस्तार और निवेश की नई संभावनाओं को लेकर सरकार प्रतिबद्ध, सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत 30 दिनों के अंदर उद्योगों को एन०ओ०सी० देने की व्यवस्था की है। समय-सीमा में निर्णय नहीं होने पर मिलेगा डीम्ड डिक्लेरेशन।
जिलों में उद्योगपतियों के साथ मासिक बैठक में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक की भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल।
बिहार के उद्यमियों को 50 करोड़ रुपये तक के सरकारी टेंडर में प्राथमिकता देने की व्यवस्था। बिहार क्रय वरीयता नीति के तहत बिहार में उत्पादित गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की 25 से 40 प्रतिशत खरीद राज्य सरकार करेगी।
पटना, 05 नवम्बर 2026 मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बी०आई०ए०) के 82वें वार्षिक समारोह का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया।
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उद्योग एवं निवेश को बढ़ावा देने के लिए हर महीने उद्योग मंत्री के स्तर पर बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन तथा अन्य औद्योगिक संगठनों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में उद्यमियों की समस्याओं, औद्योगिक नीतियों में आवश्यक बदलाव एवं निवेश से जुड़े सुझावों पर चर्चा होगी। उद्योगपतियों की बैठक में प्रत्येक माह जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहें इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा। उद्योग विभाग इसकी मॉनिटरिंग करेगा और आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री स्तर से भी इसकी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1943 में स्थापित बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन पिछले 82 वर्षों से राज्य की औद्योगिक एवं आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। एसोसिएशन का यह गौरवशाली सफर बिहार के विकास के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी देश को विकसित एवं शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी ने बिहार को समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनके बताए रास्ते पर आगे बढ़ते हुए हम विकसित भारत एवं समृद्ध बिहार के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में बिहार में एक हजार से अधिक बड़ी औद्योगिक इकाइयों को धरातल पर उतारने की दिशा में काम किया गया है। इसके लिए उद्यमियों को जमीन एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उद्योग स्थापना में आ रही विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक एवं कानूनी बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया गया है। राज्य में निवेश एवं औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सेमीकंडक्टर पॉलिसी, जी०सी०सी० पॉलिसी, आई०टी० पॉलिसी एवं ए०आई० पॉलिसी बनाई गई हैं। फार्मास्यूटिकल पॉलिसी भी तैयार हो चुकी है। इस दिशा में फार्मास्यूटिकल कंपनियों एवं उद्यमियों के सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिहार में उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत 30 दिनों के अंदर उद्योगों को एन०ओ०सी० देने की व्यवस्था की है। निर्धारित समय-सीमा में एन०ओ०सी० नहीं मिलने पर डीम्ड डिक्लेरेशन का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सहयोग कार्यक्रम के माध्यम से पिछले पांच महीनों में आम लोगों से प्राप्त 13 लाख आवेदनों में 96 प्रतिशत का निष्पादन किया जा चुका है। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार आगे भी आवश्यक नीतियां, प्रोत्साहन पैकेज एवं प्रशासनिक सुधार लागू करती रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गया जी में इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। बिहार में 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें अर्बन टाउनशिप, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, स्कूल, कॉलेज एवं अन्य आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पाटलिपुत्र टाउनशिप को लगभग 80 हजार एकड़ भूमि पर विकसित करने की योजना है। इसमें जमीन देने वाले भू-स्वामियों को विकसित भूमि का 55 प्रतिशत हिस्सा वापस करने का प्रावधान है। स्वेच्छा से जमीन देने वाले भू-स्वामियों को चार गुना मुआवजे के अतिरिक्त 10 प्रतिशत राशि देने की व्यवस्था भी की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की आर्थिक समृद्धि के लिए आधारभूत संरचना का विकास बेहद जरूरी है। राज्य में सड़क, बिजली एवं पानी की उपलब्धता में व्यापक सुधार हुआ है। पहले बिहार में बिजली की खपत प्रतिमाह लगभग 300 से 350 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 10 हजार मेगावाट से अधिक हो गई है। वर्ष 2030 तक बिहार में 30 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सोलर, पंप स्टोरेज, थर्मल एवं बैटरी स्टोरेज प्लांट स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। बिजली एवं पानी की पर्याप्त उपलब्धता बिहार के औद्योगिक एवं आर्थिक भविष्य को नई दिशा दे सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित होते हैं। नदियों में गाद की समस्या के समाधान के लिए गाद प्रबंधन नीति बनाई गई है। इस वर्ष गंगा, गंडक एवं सोन नदियों में बाढ़ का स्तर काफी अधिक रहा। सोन नदी में लगभग 11.5 लाख क्यूसेक पानी प्रवाहित हुआ तथा गंगा नदी का जलस्तर पिछले 100 वर्षों में सर्वाधिक दर्ज किया गया। नदी प्रबंधन एवं गंगा सफाई अभियान की दिशा में भी काम किया जा रहा है। भारत सरकार को गाद की आवश्यकता है और इसके लिए बिहार सरकार के साथ समझौता किया गया है। आने वाले वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में बड़े-बड़े विश्वविद्यालय स्थापित हो रहे हैं। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 18 हजार करोड़ रुपये विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं उच्च शिक्षा के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों को पी०पी०पी० मोड पर विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। जिला एवं अनुमंडल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े अस्पतालों में रेफर नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि बिहार में उद्योगों की स्थापना के लिए जमीन, बिजली, पानी एवं सुरक्षा सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बिहार में 50 करोड़ रुपये तक के सरकारी टेंडर में राज्य से जुड़े उद्यमियों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बिहार क्रय वरीयता नीति के तहत बिहार में उत्पादित गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की 25 से 40 प्रतिशत खरीद राज्य सरकार द्वारा किए जाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि राज्य में उत्पादित वस्तुओं को बाजार मिले और बिहार का पैसा बिहार के लोगों के बीच ही रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर उपलब्ध संसाधनों एवं जमीन का बेहतर उपयोग जरूरी है। जिलों में उपलब्ध सस्ती जमीन पर आधारभूत संरचना विकसित कर औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे जिलों की जी०डी०पी० में वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि बिहार अपना भाग्य बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है। बिहार के 14 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। बिहार बदलेगा, तभी देश के विकास को भी नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सदस्यों एवं उद्योग जगत से जुड़े सभी लोगों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एसोसिएशन की ओर से मिलने वाले सुझावों एवं समस्याओं का हरसंभव समाधान किया जाएगा। बिहार में उद्योग एवं निवेश को गति देने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने उद्यमियों से बिहार के औद्योगिक विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं उपलब्धियों के लिए राज्य की औद्योगिक इकाइयों से जुड़े उद्यमियों श्री जगजीवन सिंह को एस०आर० रूंगटा मेमोरियल अवार्ड, श्री गौरव साह को बी० पी० गुप्ता मेमोरियल अवार्ड तथा श्री अरुण अग्रवाल को डी०पी० साबू मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के निवर्तमान पदाधिकारियों उपाध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम कुमार अग्रवाल, उपाध्यक्ष श्री अखिलेश कुमार, महासचिव श्री अमरनाथ जायसवाल एवं कोषाध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को अंगवस्त्र, फोटो एलबम एवं प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बी०आई०ए० के अध्यक्ष श्री रामलाल खेतान ने मुख्यमंत्री को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिह्न भेंटकर उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम को बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रामलाल खेतान ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर उद्योग मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रामलाल खेतान, उद्योग विभाग के सचिव श्री कुंदन कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री संजय कुमार सिंह बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महासचिव श्री मनीष कुमार, उपाध्यक्ष श्री वासुदेव प्रसाद एवं श्री देव प्रकाश सिंह, लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष श्री श्याम सुंदर भीमसरिया, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्री के०पी०एस० चौधरी सहित अन्य वरीय अधिकारी एवं उद्योग जगत से जुड़े गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।




