आरा/आशुतोष पाण्डेय!
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में टेंडर और वित्तीय अनियमितताओं का मामला! एजी रिपोर्ट ने खड़े किए गंभीर सवाल, आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं चुनिंदा संवेदक?
आरा। बिहार में सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा और उसके अधीन आने वाले महाविद्यालयों में भी निर्माण कार्य, मरम्मत, रंगाई-पुताई और अन्य खरीदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एसबी कॉलेज, आरा में एजी विभाग की जांच रिपोर्ट में विभिन्न कार्यों को लेकर वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताओं पर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया को दरकिनार कर कुछ चुनिंदा संवेदकों को लगातार काम मिलने का रास्ता साफ किया गया।
विश्वविद्यालय से लेकर महाविद्यालयों तक सरकारी और संस्थागत राशि से होने वाले कार्यों की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए? आखिर टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
माननीय कुलाधिपति महोदय एवं बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग से जनहित में प्रमुख मांगें हैं—
- एसबी कॉलेज की एजी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय एवं सभी अंगीभूत महाविद्यालयों में पिछले पांच वर्षों के निर्माण, मरम्मत, रंगाई-पुताई और खरीदारी की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- टेंडर प्रक्रिया में शामिल संवेदकों और कार्य आवंटन की निष्पक्ष जांच हो।
- सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और संवेदकों पर कठोर कार्रवाई हो।
- जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
सवाल शिक्षा व्यवस्था की साख का है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण का केंद्र है, किसी की निजी कमाई का जरिया नहीं बनना चाहिए।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच के आदेश कब जारी होते हैं।



