सहारा इंडिया पर निवेशकों के साथ छल और गुमराह करने का आरोप

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सचिन केजरीवाल की रिपोर्ट

सहारा की गलतियों की वजह से एस्क्रो खाते में पड़े हैं निवेशकों के करोड़ों

साहिबगंज

सहारा समूह के जालसाजी प्रकरण को ले कर हम हर दिन नई बातों का खुलासा कर रहें हैं, जिसे अब तक विभिन्न सहारा शाखा कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा अपने निवेशकों से छिपाया गया और उन्हे धोखे में रखा गया है। बता दें की सहारा से अपना भुगतान पाने के लिए पिछले दो – तीन वर्षों से कार्यालय का धक्का खाने वाले निवेशकों ने अब अपने भुगतान को ले कर विकास चौधरी की अध्यक्षता वाली एक कमिटी सहारा निवेशक संघर्ष समिति का गठन किया है। इसी कड़ी में आज हम आपको बताते है कि जिले की सिर्फ साहिबगंज शाखा को अपने निवेशकों को कितना भुगतान करना है, अगर सूत्रों की माने तो आज की तारीख में सहारा की साहिबगंज शाखा को लगभग 175 करोड़ का भुगतान अपने निवेशकों को करना है। अब तक जिन निवेशकों से हम मिले हैं उनके द्वारा बताई गई रकम और निवेशकों की संख्या का अनुमान लगाया जाए हो सकता की ये रकम और भी ज्यादा बढ़ सकती है, ध्यान रहे ये सब समूह की सिर्फ एक शाखा के अनुमानित आंकड़े हैं, देश के बाकी हिस्सों में जो सहारा समूह के कार्यालयों में निवेशकों की जमा पूंजी है वो अलग। आइए अब आपको बताते हैं की निवेशकों की इतनी बड़ी रकम आखिर आज सहारा समूह के पास क्यों है जिसको ले कर इतना हो हल्ला मचा हुआ है। हमने जब इस विषय पर अपनी पड़ताल शुरू की तो सहारा समूह द्वारा अपने निवेशकों को ठगे जाने का एक और मामला सामने आया, दरअसल वर्ष 2012 में जब सहारा सेबी प्रकरण सामने आया और सेबी ने समूह का 15700 करोड़ रुपया अपने एस्क्रो खाते में जमा करवाया था, ध्यान रहे इस पैसे या कहे इससे भी ज्यादा पैसे की उगाही समूह द्वारा सेबी के द्वारा तय मानकों का उल्लंघन करते हुए समूह की दो स्कीमों हाउसिंग फाइनेंस और रियल एस्टेट द्वारा निवेशकों से उठाया गया था, तब सेबी ने ये आश्वासन दिया था की इस पैसे को वो इन दोनों स्कीमों में निवेश करने वाले निवेशकों को अपने संरक्षण में वापस लौटाएगी| जिसके लिए सेबी ने देश के विभिन्न लगभग 150 अखबारों में कई बार विज्ञापन प्रकाशित करते हुए 129 करोड़ रुपए का भुगतान भी समूह के निवेशकों को किया था।अब आप सोच रहे होंगे की सेबी ने सिर्फ 129 करोड़ का भुगतान ही क्यों किया, जबकि उसके पास भुगतान के लिए 15700 करोड़ जैसी बड़ी रकम थी, तो आप ध्यान दीजिए कि क्या आप भी कभी इन दोनों स्कीमों के निवेशक रहे हैं, अगर हां तो याद कीजिए क्या कभी सहारा समूह के किसी कार्यालय के किसी कर्मचारी ने आपसे कहा है की इन स्कीमों का पैसा इस प्रक्रिया से एक तय समय सीमा के भीतर सेबी द्वारा भुगतान किया जाएगा, कभी आपकी इन दोनों स्कीमों में निवेश की गई रकम के भुगतान की कोशिश किसी कार्यालय द्वारा की गई है, जवाब आप स्वयं जानते हैं। दरअसल सेबी जब निवेशकों का भुगतान कर रहा था तब सहारा समूह का हर एक कार्यालय इन स्कीमों के निवेशकों के निवेश को दूसरी स्कीमों में ट्रांसफर करवाने में लगा हुआ था। जो की सहारा समूह और उसके कर्मचारियों की एक और गैर जिम्मेदाराना हरकत को दर्शाता है, पहले समूह द्वारा गैर कानूनी तरीके से बाजार से निवेशकों द्वारा पैसे उठाए गए और फिर जब सेबी ने समूह पर अपना शिकंजा कसा तो समूह अपने निवेशकों का भुगतान सेबी से करवाने के बजाय उनसे दूसरी स्कीमों में निवेश को ट्रांसफर करवाने ने जुट गया, और अब भुगतान न कर पाने की स्तिथि में सहारा समूह द्वारा सेबी को जिम्मेदार ठराया जा रहा है। ये सारी बाते हमने यूं ही नहीं कही है, बल्कि इसके पीछे के तथ्यों को निवेशक भी जान रहे हैं, इस लिए आज जो स्तिथि सहारा समूह की है उसके लिए वो स्वयं जिम्मेदार है, मगर इन सब के बीच निवेशकों को काफी सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, और इसके लिए जितना समूह के बोर्ड डायरेक्टर जिम्मेदार हैं उससे ज्यादा स्थानीय शाखाओं के कर्मचारी जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने सब जानते हुए भी अपने निवेशकों का निवेश किया पैसा दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करवा कर उन्हे फंसाने का काम किया है। सेबी द्वारा अबतक किए गए भुगतान का लाभ सिर्फ कुछ निवेशकों को ही मिल सका है, जिसका कारण है की सहारा के ज्यादातर निवेशकों का सहारा पर विश्वास होना और समूह की हर बात को मान लेना| मगर यहां सहारा ने अपने निवेशकों से छल करते हुए उन्हे गुमराह करने का काम किया था| बता दें की सहारा की स्थापना ही गरीबों के पैसों के निवेश के लिए की गई थी, और इस समूह में आज भी ज्यादातर गरीबों का ही पैसा फंसा हुआ है।

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