रामजी साह की रिपोर्ट
रामगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से काम की तलाश में केरल जाने को मजबूर हैं ग्रामीण
रामगढ़(दुमका)
संथाल परगना से मजदूरों का पलायन कोई नयी बात नहीं, लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते प्रभाव के बीच मजदूरों का पलायन प्रखंंड एवं जिला प्रशासन के दावों की पोल खोलता साफ नजर आ रहा है| जिला के विभिन्न प्रखंडों में दावा किया जाता है कि मजदूरों को मनरेगा के तहत 100 दिनों का काम दिया जा रहा है, मगर सरजमीन पर कुछ और ही देखने को मिल रहा है|आज हम बात कर रहे हैं रामगढ़ प्रखंड से हो रहे पलायन की|बताते चलें कि सिर्फ बरसाती मौसम को छोड़कर बाकी 9 माह तक लगातार केरल की दर्जनो बसो द्वारा स्थानीय दलालों के माध्यम से अवैध रुप से मजदूरों को केरल भेजा जा रहा है|इन दिनो मोहनपूर, गम्हरियाहाट, लुटीया,कांजो,बोडिया,लतबेरवा,भालसूमर आदि क्षेत्रो से मजदूरों का पलायन जारी है|मजदूरों के अनुसार रामगढ़ प्रखंड में मनरेगा योजना में बिचोलियों का राज रहने के कारण काम नही मिलता है|अपने और परिवार के पेट की भूख मिटाने के लिए बाहर जाना पड़ता है|हाल फिलहाल अन्य राज्यों में गये प्रवासी मजदूरों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है| चार माह पुर्व उतराखंड में गलेशियर फटने से रामगढ के जालवे तथा डुमरजोर को दो मजदूरों की मौत हो गई थी|26 दिसंबर को जालवे के ही वृस्पति पुजहर की गुजरात में सड़क दुर्धटना में मौत हो गई थी| इसके बाबजूद मजदूरों का दूसरे प्रदेशो में पलायन जारी है|
मामले में बीडीओ कम्लेन्द्र सिन्हा ने बताया कि पंचायतों में मनरेगा का काम जारी है,अगर कोई मजदूर काम नही करेगा तो क्या कहा जा सकता है|




