रिपोर्ट – रवि कुमार!
रोहतास से न्यायपालिका की ताकत दिखाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। कहा जाता है कि कानून से बड़ा कोई नहीं, और इसे सच साबित कर दिखाया है सत्र न्यायालय ने। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-4 अनिल कुमार की अदालत ने न्यायालय के आदेश की लगातार अवहेलना करने पर रोहतास के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और वर्तमान में सारण जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) रौशन कुमार पर एक रुपये का सांकेतिक जुर्माना लगाया है।
भले ही जुर्माने की राशि सिर्फ एक रुपया है, लेकिन इसका संदेश बहुत बड़ा है। यह आदेश पूरे पुलिस महकमे और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक नजीर है।
DM को आदेश – 15 दिन में वेतन से काटकर जमा कराएं एक रुपया
न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 384 के तहत पारित अपने आदेश में रोहतास के जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे वरीय पुलिस अधीक्षक,सारण रौशन कुमार के मासिक वेतन से एक रुपये की कटौती कर 15 दिनों के भीतर सत्र न्यायालय की नजारत (Nazarat) में जमा कराना सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा है कि यह एक सांकेतिक दंड है, लेकिन इसका उद्देश्य न्यायिक आदेशों के प्रति सम्मान बहाल करना है।
क्या है पूरा मामला, क्यों नाराज हुई अदालत?
जानकारी के अनुसार, अपर सत्र न्यायाधीश-4 की अदालत में एक गंभीर सत्र वाद की सुनवाई चल रही है। इस वाद में शामिल आरोपितों के आपराधिक इतिहास (Criminal History) और उनके विरुद्ध अब तक की गई पुलिसिया कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट तलब की गई थी। न्यायालय ने इसके लिए एसपी रोहतास को लिखित आदेश दिया था।
लेकिन आरोप है कि पुलिस की ओर से इस आदेश को गंभीरता से नहीं लिया गया। तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी न तो आपराधिक इतिहास की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की जानकारी दी गई।
इस लापरवाही को देखते हुए कोर्ट ने तत्कलीन एसपी को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) भी जारी किया था, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें। लेकिन उसका भी जवाब नहीं आया।
आदेश में कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया है कि इस मामले में साक्ष्य (Evidence) के लिए 28 अगस्त, 7 सितंबर, 11 सितंबर, 14 सितंबर और 22 सितंबर की तिथियां निर्धारित थीं। इन सभी तिथियों पर एसपी को या तो स्वयं उपस्थित होना था या अपने किसी अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से रिपोर्ट भिजवानी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसे न्यायालय ने घोर लापरवाही और आदेश की अवहेलना माना।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अपने आदेश में न्यायाधीश अनिल कुमार ने सख्त टिप्पणी करते हुए लिखा है कि – “न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की प्रवृत्ति को प्रारंभ में ही रोकना अत्यंत आवश्यक है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया बाधित होगी, बल्कि आम लोगों का न्याय व्यवस्था से विश्वास भी उठ जाएगा।”
सेवा अभिलेख में दर्ज होगा मामला, DGP-मुख्य सचिव को भी भेजी गई प्रति
कोर्ट ने सिर्फ जुर्माना लगाकर ही इतिश्री नहीं की। अदालत ने इस आदेश की प्रति बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP), मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी भेजने का निर्देश दिया है।
साथ ही सबसे बड़ी कार्रवाई यह है कि इस अवहेलना को एसएसपी रौशन कुमार के वार्षिक सेवा अभिलेख (Annual Service Record) में दर्ज कराने का भी आदेश दिया गया है, जिसका असर उनके भविष्य के प्रमोशन और पोस्टिंग पर भी पड़ सकता है।
इस फैसले के बाद न्यायिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और इलाके में इसकी खूब चर्चा हो रही है।



