रिपोर्ट- निभाष मोदी!
भागलपुर पर मंडरा रहा जलप्रलय का खतरा! गंगा-कोसी के रौद्र रूप से 178 गांवों में हाहाकार, 2.17 लाख लोग बाढ़ की जद में—डीएम की चेतावनी, प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
भागलपुर। गंगा और कोसी नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने भागलपुर में बाढ़ के संकट को बेहद गंभीर बना दिया है। नदियों के बढ़ते उफान के बीच जिले के कई इलाकों में पानी का फैलाव लगातार बढ़ रहा है। गांवों से लेकर वार्डों तक बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है और बड़ी आबादी सुरक्षित ठिकानों की तलाश में है। हालात ऐसे हैं कि प्रशासन को बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाना पड़ रहा है।
बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने समाहरणालय में आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मौजूदा हालात और प्रशासन की तैयारियों की जानकारी दी। आंकड़े खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि भागलपुर में बाढ़ का खतरा कितना बड़ा हो चुका है। डीएम के मुताबिक जिले की 56 पंचायतों के 178 गांव और 347 वार्ड बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 2 लाख 17 हजार 811 लोग बाढ़ की चपेट में हैं।यानी जिले की एक बड़ी आबादी इस समय बाढ़ के संकट से जूझ रही है। कई प्रभावित इलाकों में लोगों के सामने घर, भोजन, आवागमन और पशुओं की सुरक्षा जैसी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। लगातार बढ़ते पानी ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।
22 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ने से पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान लगातार जारी है। जिला प्रशासन के मुताबिक अब तक 22 हजार 35 लोगों को प्रभावित इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।लोगों के सुरक्षित आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 71 सरकारी और अधिग्रहित नावों का परिचालन किया जा रहा है। प्रशासन की टीमें उन इलाकों पर विशेष नजर रख रही हैं जहां सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है या पानी तेजी से फैल रहा है।
राहत के लिए 15 सामुदायिक रसोइयां, एक लाख से ज्यादा लोगों को भोजन
बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने की है। इसके लिए जिले में 15 सामुदायिक रसोइयां संचालित की जा रही हैं। प्रशासन के अनुसार 24 तारीख से अब तक इन रसोइयों के माध्यम से एक लाख से अधिक लोगों को भोजन कराया जा चुका है।वहीं बाढ़ पीड़ित परिवारों को बारिश और पानी से बचाने के लिए करीब 4 हजार पॉलीथिन शीट और तिरपाल वितरित किए जा चुके हैं। प्रशासन का कहना है कि जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री उपलब्ध कराने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
सात राहत शिविरों में पहुंचाए जा रहे बाढ़ पीड़ित
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए टीएनबी कॉलेजिएट समेत सात प्रमुख स्थानों पर राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। इन शिविरों में विस्थापित लोगों को सुरक्षित स्थान, भोजन और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।प्रशासन की कोशिश है कि जिन इलाकों में पानी का खतरा बढ़ रहा है, वहां रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
इंसानों के साथ पशुओं की भी सुरक्षा की तैयारीबाढ़ में पशुधन को बचाना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। इसके लिए अब तक 9 हजार 343 पशुओं का पंजीकरण किया गया है। जरूरत पड़ने पर पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
एसडीआरएफ की 5 टीमें और 17 मोटरबोट मोर्चे पर
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की पूरी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एसडीआरएफ की 5 टीमें, 17 मोटरबोट और 501 आपदा मित्र तैनात किए गए हैं।आपदा मित्रों और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रखा गया है, ताकि अचानक किसी इलाके में पानी बढ़ने या लोगों के फंसने की स्थिति में तत्काल बचाव अभियान शुरू किया जा सके।
डीएम की अपील—लापरवाही न करें, प्रशासन के निर्देशों का पालन करें
जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने कहा कि जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्यों को लगातार तेज किया जा रहा है।मौजूदा हालात में सबसे बड़ा खतरा उन इलाकों को लेकर है जहां जलस्तर बढ़ने के साथ पानी का फैलाव और बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा करने के बजाय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।गंगा और कोसी का बढ़ता जलस्तर भागलपुर के लिए गंभीर चेतावनी बन चुका है। 178 गांव, 347 वार्ड और 2 लाख 17 हजार से अधिक प्रभावित लोगों का आंकड़ा बताता है कि संकट छोटा नहीं है। अब सबसे बड़ी नजर नदियों के जलस्तर और अगले कुछ घंटों में बदलने वाले हालात पर है।
बाइट—अलंकृता पांडेय, जिलाधिकारी, भागलपुर




