रिपोर्ट – निभाष मोदी
भागलपुर | 2 सितंबर 2026
भागलपुर में गंगा अब सिर्फ नदी नहीं, बल्कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खौफ का दूसरा नाम बनती जा रही है। गंगा के तेज कटाव ने मंदरोनी, इंग्लिश फरका और मसाढ़ू इलाके में तबाही मचा रखी है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि जिन लोगों ने तिनका-तिनका जोड़कर वर्षों की मेहनत से अपना आशियाना खड़ा किया था, वही लोग अब अपने हाथों से उस आशियाने को तोड़कर सुरक्षित जगह की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।आज 2 सितंबर की सुबह का यह भयावह नजारा इलाके में गंगा के बढ़ते कटाव की गंभीर तस्वीर सामने लेकर आया। कहीं घर की दीवारें तेज कटाव के बीच भरभराकर गिरती दिखाई दीं, तो कहीं लोग अपने घरों से जरूरी सामान निकालते नजर आए। लोगों को डर है कि कहीं अगला नंबर उनके घर का न हो जाए।मंदरोनी, इंग्लिश फरका और मसाढ़ू में पिछले दो दिनों के दौरान कई घर कटाव की चपेट में आकर जमींदोज हो चुके हैं। कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि लोगों के पास अपने सामान और परिवार को सुरक्षित निकालने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जिन्होंने वर्षों की कमाई लगाकर अपने लिए एक छोटा सा आशियाना बनाया था। जिस घर की दीवारों के बीच बच्चों का बचपन बीता, जहां परिवार ने सुख-दुख के अनगिनत पल गुजारे, आज उसी घर को लोग खुद तोड़ रहे हैं, ताकि कम से कम ईंट, लकड़ी, टीन और घर का जरूरी सामान बचाया जा सके।महिलाओं की आंखों में आंसू हैं और पुरुषों के चेहरे पर बेबसी और गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने तिनका-तिनका जोड़कर अपना घर बनाया था, लेकिन गंगा की तेज धार उनकी वर्षों की मेहनत को पलभर में निगलने पर आमादा है।
ग्रामीणों के मुताबिक कटाव लगातार बढ़ रहा है और अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में कई और घर गंगा की धारा में समा सकते हैं। इससे बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रहने और सुरक्षित ठिकाने का संकट खड़ा हो सकता है।कटाव प्रभावित लोगों का कहना है कि प्रशासन से लगातार मदद और सुरक्षा की उम्मीद है। ग्रामीण चाहते हैं कि कटाव को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि बची हुई आबादी और उनके घरों को गंगा के कहर से बचाया जा सके।
भागलपुर के इन इलाकों से सामने आ रही तस्वीरें सिर्फ कटाव की कहानी नहीं बता रहीं, बल्कि उन परिवारों की बेबसी भी दिखा रही हैं, जिनके लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस घर को बचाने के लिए पूरी जिंदगी लगा दी, क्या उसे बचाने का समय अब भी उनके पास बचा है?




