भागलपुर – राघोपुर में तटबंध कटाव से मचा हाहाकार, लोगों में भारी आक्रोश, स्थायी समाधान की माँग!

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रिपोर्ट – निभाष मोदी!

राघोपुर में तटबंध कटाव से मचा हाहाकार, मौके पर पहुंचीं अर्पणा कुमारी; बोलीं—‘अब प्रार्थना नहीं, जवाबदेही और स्थायी समाधान चाहिए’

नवगछिया। राघोपुर तटबंध कटाव की भयावह स्थिति के बीच पूर्व बिहपुर विधानसभा प्रत्याशी सुश्री अर्पणा कुमारी ने कटाव प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। उन्होंने ब्रह्म बाबा स्थान, चैती मां दुर्गा स्थान और राघोपुर कटाव स्थल का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी परेशानियां सुनीं। मौके पर जल संसाधन विभाग सहित जिला और अनुमंडल स्तर के अधिकारी, एसडीएम और कार्यपालक अभियंता समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।निरीक्षण के बाद अर्पणा कुमारी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 27 जुलाई से तटबंध में कटाव शुरू होने के बाद समय रहते वैज्ञानिक और हाइड्रोलॉजिकल सर्वे कराया जाता तो शायद आज स्थिति इतनी भयावह नहीं होती। उन्होंने वर्षों से कटावरोधी कार्यों पर खर्च हो रहे करोड़ों रुपये के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने पर सवाल उठाया।उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से 2019 तक नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र में कटावरोधी कार्यों पर करीब 699 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आई है। वर्ष 2026 में भी करीब पांच करोड़ रुपये के कार्य कराए जाने की जानकारी है। इसके बावजूद लगातार कटाव जारी रहना गंभीर चिंता का विषय है।अर्पणा कुमारी ने राघोपुर नाव हादसे में लापता श्रमिक बादल कुमार और सिकंदर मंडल के परिवारों के प्रति चिंता जताते हुए दोनों की युद्धस्तर पर खोजबीन की मांग की। उन्होंने परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता, सरकारी मुआवजा और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने पर विचार करने की मांग की।
उन्होंने कटावरोधी कार्य में लगे श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए और सभी श्रमिकों को लाइफ जैकेट, सुरक्षा उपकरण तथा सुरक्षित कार्य व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की।अर्पणा कुमारी ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने राघोपुर सहित गंगा के उत्तरी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक बाढ़ एवं कटाव सुरक्षा योजना बनाने की मांग की।उन्होंने कहा कि राघोपुर को हर साल आने वाली बाढ़ और कटाव की त्रासदी से बचाने के लिए अब सिर्फ अस्थायी राहत नहीं, बल्कि स्थायी समाधान, वैज्ञानिक योजना और विभागीय जवाबदेही तय करना जरूरी है।

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