रौशन पंडित हत्याकांड पर उबाल: कलेक्ट्रेट तक उमड़ा जनसैलाब, गिरफ्तारी की मांग पर डटे रहे प्रदर्शनकारी!

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रिपोर्ट :- संतोष चौहान

भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस-प्रदर्शनकारियों में धक्का-मुक्की, डीएम-एसपी के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ आंदोलन

सुपौल :- त्रिवेणीगंज के बहुचर्चित रौशन पंडित हत्याकांड को लेकर बुधवार को सुपौल जिला मुख्यालय में जनाक्रोश खुलकर सामने आया। कुम्हार समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट तक जोरदार प्रदर्शन किया। प्रशासन की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने तथा जिले में मंत्रियों के प्रस्तावित कार्यक्रम के कारण पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी विभिन्न स्थानों से जुटकर जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। इस दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की, तीखी नोकझोंक और तनावपूर्ण स्थिति भी बनी। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस आंदोलन का समापन तब हुआ, जब जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने पीड़ित परिवार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
रौशन पंडित की हत्या के बाद से ही त्रिवेणीगंज समेत पूरे जिले में लोगों के बीच गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। परिजनों और समाज के लोगों का आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जिससे लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी के विरोध में बुधवार को जिला मुख्यालय में विशाल प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।
प्रदर्शन की पूर्व सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क था। सुबह से ही सुपौल शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। लोहिया चौक से कलेक्ट्रेट जाने वाले मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाकर आम लोगों की आवाजाही नियंत्रित की गई। कलेक्ट्रेट मुख्य द्वार, लोहिया नगर चौक, थाना चौक एवं आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, महिला पुलिस बल तथा दंडाधिकारी तैनात किए गए थे। त्रिवेणीगंज सहित जिले के विभिन्न थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया था। पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी का रूप में तब्दील कर दिया गया था ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
दोपहर करीब एक बजे व्यापार संघ भवन के समीप बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटने लगे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित सैकड़ों लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर न्याय की मांग के समर्थन में नारेबाजी शुरू की। इसके बाद सभी लोग जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने लगे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
जैसे ही जुलूस लोहिया नगर चौक पहुंचा, वहां पहले से मौजूद पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ देर बाद प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश करने लगे, जिसके कारण पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति उत्पन्न हो गई। हालांकि पुलिस ने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रित में रखा और किसी प्रकार की बल प्रयोग की नौबत नहीं आने दी।
इसके बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट मुख्य द्वार तक पहुंच गए और सड़क पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारी लगातार रौशन पंडित के हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा तथा पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते रहे। आंदोलनकारियों का कहना था कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
धरना प्रदर्शन के दौरान कई सामाजिक प्रतिनिधियों और समाज के वरिष्ठ लोगों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति की हत्या समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है और ऐसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई होना आवश्यक है। वक्ताओं ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कानून के दायरे में लाने की मांग की।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मिलने की अनुमति दी गई। प्रतिनिधिमंडल में रौशन पंडित की पत्नी, दोनों पुत्र सहित परिवार के अन्य सदस्य शामिल थे। अधिकारियों के समक्ष प्रतिनिधिमंडल ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए दोषियों की जल्द गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और परिवार को न्याय दिलाने की मांग रखी।
जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है तथा कानून के अनुसार दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और जांच निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ेगी। अधिकारियों ने लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा प्रशासन पर विश्वास रखने की भी अपील की।
प्रशासन के इस आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल बाहर आया और प्रदर्शनकारियों को वार्ता की जानकारी दी। इसके बाद आंदोलनकारियों ने आपसी सहमति से धरना समाप्त करने की घोषणा की। धीरे-धीरे लोग वहां से शांतिपूर्वक वापस लौटने लगे और करीब डेढ़ घंटे बाद यातायात व्यवस्था भी सामान्य हो गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली कि पूरा प्रदर्शन बिना किसी बड़ी अप्रिय घटना के समाप्त हो गया।
हालांकि प्रदर्शन समाप्त होने के बाद भी रौशन पंडित हत्याकांड को लेकर लोगों में आक्रोश बरकरार था। समाज के लोगों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखती है तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। दूसरी ओर प्रशासन ने भी मामले की जांच में तेजी लाने और दोषियों को जल्द कानून के शिकंजे में लाने का भरोसा दोहराया है।
फिलहाल पूरे जिले की नजर इस बहुचर्चित हत्याकांड की जांच और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली प्रगति पर पीड़ित परिवार के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर बनी रहेगी।

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