सोनी कुमारी बाबा उग्रनाथ महादेव मंदिर के तदर्थ प्रबंध न्यासी नियुक्त की गई!

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रिपोर्टर– राजीव कुमार झा!

बाबा उग्रनाथ महादेव मंदिर के तदर्थ प्रबंध न्यासी नियुक्त होने पर सोनी कुमारी ने जद(यू.) नेतृत्व एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के प्रति जताया आभार

मधुबनी जिले के पंडौल प्रखंड स्थित भवानीपुर गांव के प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक महत्व के बाबा उग्र नाथ महादेव मंदिर को लेकर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना द्वारा जारी आदेश के अनुसार उक्त मिथिलांचल की आस्था के प्रमुख केंद्र एवं प्रसिद्ध बाबा श्री श्री 108 उग्रनाथ महादेव मंदिर, भवानीपुर, प्रखंड पंडौल, जिला मधुबनी के सुचारु संचालन, मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण एवं विकास के उद्देश्य से जद(यू.) नेत्री सोनी कुमारी को न्यास समिति के तदर्थ प्रबंध न्यासी नियुक्त किया गया है।
इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए सोनी कुमारी ने जद (यू.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ,राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा,प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा , कोषाध्यक्ष सह विधान परिषद सदस्य ललन सर्राफ, सांसद रामप्रीत मंडल , जद(यू.) मधुबनी के जिला अध्यक्ष नारायण भंडारी तथा जद(यू.) की वरिष्ठ नेत्री संगीता ठाकुर के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया है। साथ ही उन्होंने बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष एवं सभी सम्मानित पदाधिकारियों के प्रति भी कृतज्ञता प्रकट की है।
सोनी कुमारी ने कहा कि बाबा उग्रनाथ महादेव मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उन्हें सौंपे गए इस दायित्व का निर्वहन उनके द्वारा पूर्ण निष्ठा, पारदर्शिता एवं ईमानदारी के साथ किया जाएगा। मंदिर की गरिमा, धार्मिक परंपराओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं तथा न्यास की संपत्तियों की सुरक्षा एवं सुव्यवस्था उनके सर्वोच्च प्राथमिकता मे होगी।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि विश्व विख्यात सावन पूजा एवं श्रावणी मेला के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों शिवभक्तों को बेहतर सुविधा, स्वच्छ एवं व्यवस्थित दर्शन, सुरक्षा तथा सुचारु व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन एवं संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर हरसंभव प्रयास किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और बाबा उग्रनाथ धाम की गरिमा और अधिक बढ़े।
श्रीमती सोनी कुमारी ने कहा है कि यह दायित्व उनके लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति एवं समाज की सेवा का एक पवित्र अवसर है। वे सभी श्रद्धालुओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासन तथा समाज के सहयोग से मंदिर के सर्वांगीण विकास एवं धार्मिक परंपराओं के संरक्षण हेतु सतत कार्य करती रहेंगी।

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