पटना ग्रामीण- हजारों बीघा जमीन गंगा में विलीन , दर्जनो गाँव पर खतरा!

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:- रवि शंकर अमित!

उद्योग/टाल/ दियारा सब बर्बाद!

मोकामा- बड़हिया जो कभी औद्योगिक क्षेत्र हुआ करता था, जिसने देश को दर्जनो नेताओं से नवाज़ा, आज भी इनमें कई देश स्तर पर जाने जाते हैँ तो कई प्रदेश के प्रमुख नेताओं में शुमार हैँ, बाबजूद एक एक कर सभी उद्योगों पर ताला लग गया,पिछले साल तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और वर्तमान के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परशुराम महोत्सव के दौरान मंच से मोकामा को इंडस्ट्रियल हब बनाने की घोषणा की थी, पर शायद मुख्यमंत्री बन जाने के बाद अधिक कार्य रहने के कारण उनकी घोषणा फ़ाइल से बाहर नहीं आ सकी! हालांकि औपचारिकता के लिये अधिकारीयों या नेताओं का आना जाना लगा रहता है, लोग उम्मीद भरी दृष्टि से उनका सहृदय सत्कार भी करते हैँ.. और ये सब सालों से चलता आ रहा है दो चार दिन पहले भी अधिकारी आये और चले गये,हाँ एक जो सबसे अच्छी बात है वो अधिकारीयों या नेताओं द्वारा दिया जाने वाला आश्वासन, वो हमेशा मिलता रहा है और आगे भी मिलता रहेगा, इसके लिये मोकामा को चिंता नहीं करनी है!…. अब आइये देखें मोकामा में बचा क्या?
फिर जो बचा वो है कृषि, खेती बाड़ी, जिसके लिये जमीन चाहिए! पिछले कुछ सालों में मोकामा टाल की उपज में जलजमाव और असमय बुआई के कारण फसलों की उत्पादन क्षमता लगातार गिरती ही जा रही है, उस पर भी टाल से होकर जाने वाली नई नई परियोजनाएँ जिसमें प्रमुख रूप से हाइवे शामिल हैँ, इनके बनने के बाद बीच का पार्ट जल जमाव से ग्रसित रहने लगा , NHAI ने जितना अधिग्रहण किया उससे कई गुणा अधिक भूमि बर्बाद कर दिया,जो सैकड़ों बीघे में है,वो टाल का उपजाऊ क्षेत्र जल जमाव क्षेत्र बन गया, जिसे ना कोई देखने वाला है ना मुआवजा देने वाला! दूसरा मोकामा मुंगेर हाईवे भी बनने को तैयार है जिसके बाद टाल सिर्फ एक बड़ी झील के रूप में नजर आएगा!

अब बच गया था गंगा का दियारा जो जलोढ़ मिट्टी होने की वजह से बेहद उपजाऊ जमीन होता है, और टाल तो साल में अच्छी बुरी स्थिति में भी एक ही फ़सल देती है, लेकिन गंगा का दियारा दो फ़सल देता रहा है, मगर अफ़सोस… आज मोकामा से वो भी छिन गया!
क्यूंकि सिक्स लेन ब्रिज और डबल ट्रैक मेगा रेल ब्रिज के कारण मशीनों ने अपना काम किया और गंगा की धार गाँव की तरफ मुड़ने लगी, नतीजा यह हुआ की हजारों हजार बीघे की उपजाऊ जमीन गंगा में विलीन होती चली गई! आजकल
पटना के ग्रामीण क्षेत्रों में गंगा का रौद्र रूप नजर आ रहा है, ख़ासकर बाढ़ अनुमंडल और मोकामा में गंगा ने तांडव ही मचा रखा है!
जहाँ मोकामा पूर्वी में आधा दर्जन पंचायत के कई हजार बीघे की कृषि योग्य भूमि गंगा में समा गई है!
वहीं मोकामा पश्चिमी में भी कई पंचायत कटाव की चपेट में हैँ, स्थिति इतनी भयावह है की तस्वीर देखकर रोंगटे खड़े हो जाएँ, लिहाजा 15 पंचायत के दर्जनों गाँव के लोगों में भारी दहशत है, कि अब शायद गंगा गाँव को भी अपने साथ ना बहा ले जाय! क्यूंकि नेताओं अधिकारीयों से लोगों की उम्मीदें कब की टूट चुकी है!
सरकार को भी बहुत अधिक ध्यान देने की जरूरत नहीं है क्यूंकि मोकामा-बड़हिया के लोग कभी किसी बात के लिये आंदोलन नहीं करते, यहाँ के लोग बस राजनितिक पार्टियों के झंडे उठाते हैँ या नेताओं के आगे पीछे करते करते जीवन गुजार लेने के आदि हो चुके हैँ,यहाँ के लोग बस मीडिया, नेता,प्रशासन आदि पर दोष मढ़कर अपना दायित्व पूर्ण कर लेते हैँ! मीडिया यहाँ के लिये आवाज़ भी उठाती है तो मोकामा बड़हिया के लोग इतने शांति प्रिय हैँ ना ही इन्हें ऐसी खबरें सुनने की आदत है और ना ही ऐसी खबरों को शेयर करने की…. क्यूंकि ये कोई मनोरंजन से संबंधित रील नहीं है…. ये रीयल है और इसलिये हमने आज गंगा से हो रहे कटाव पर एक विशेष ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की, देखें शायद अब आप जाग पाएँ, शायद ये तस्वीरें आपके भी रोंगटे खड़े कर जाएँ….
मोकामा बड़हिया टाल और पटना ग्रामीण के दियारा क्षेत्रों से ब्यूरो रिपोर्ट शंखनाद!

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