कपिलेश्वर शिवालय विवाद-बंद दानपेटी खोलने के विरोध में बीडीओ ने 13 पंडों के खिलाफ की एफआईआर दर्ज!

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रिपोर्टर– राजीव कुमार झा!

मधुबनी जिले के प्रख्यात एवं मिथिला के देवघर कपिलेश्वर स्थान के शिवालय में दानपेटी खोलने और मंदिर की चल- अचल संपत्तियों के सूचीकरण को लेकर उत्पन्न विवाद अब कानूनी मोड़ पर आ गया है। बीते दिनों गुरुवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) ने रहिका थाना में पंडा समाज के 13 लोगों के विरुद्ध विधि- व्यवस्था भंग करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस के बाद मामला तब तूल पकड़ लिया है, मामले को लेकर बताया जा रहा है कि जब मधुबनी के सदर एसडीओ चंदन कुमार झा के निर्देश पर प्रखंड प्रशासन की टीम बंद दानपेटी खोलने और मंदिर की संपत्तियों का सूचीकरण करने के लिए मंदिर पहुंची थी, लेकिन वहां मौजूद पंडा समाज और स्थानीय लोगों के तीव्र विरोध के कारण प्रशासनिक टीम को स्थिति बिगड़ने के भय से बिना कार्रवाई वापस लौटना पड़ा। विरोध के बाद बीडीओ ने संबंधित पंडा समाज के खिलाफ आधिकारिक तौर पर रहिका थाना मे शिकायत दर्ज कराई है। प्रशासन के अनुसार, मधुबनी एसडीओ की अध्यक्षता में कपिलेश्वर स्थल के मंदिर एवं धर्मशाला के सुदृढ़ीकरण, सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्यों के उद्देश्य से राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अंतर्गत एक न्यास समिति का गठन किया गया था। हालांकि समिति के गठन पर स्थानीय पंडा समाज, नागरिकों और कामेश्वर धार्मिक न्यास दरभंगा की ओर से विरोध जारी है। पंडा समाज का कहना है कि उन्हें दानपेटी खोलने या समिति गठन से कोई मूलभूत आपत्ति नहीं, पर प्रक्रिया में उनकी और स्थानीय धर्मावलंबियों की भागीदारी होनी चाहिए। विरोधियों का एक और प्रमुख तर्क यह है कि मंदिर से संबंधित कुछ जमीने पंडा समाज के नाम पर रैयती भूमि के रूप में दर्ज हैं और इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजों सहित आवेदन भी दिया है। तो वही कामेश्वर धार्मिक न्यास दरभंगा का दावा है कि कपिलेश्वर स्थान शिवालय उनके न्यास से संबद्ध है। तथा जमींदारी उन्मूलन के बाद भी मंदिर की संपत्तियां स्वतः बिहार सरकार में निहित नहीं हुईं। इसी आधार पर वे गठित न्यास समिति पर पुनर्विचार और नए सिरे से समिति गठन की मांग कर रहे हैं। स्थानीय राजनैतिक और धार्मिक पर्यवेक्षक इस मामले में संतुलित एवं पारदर्शी जांच कराए जाने की अपील कर रहे हैं, ताकि धार्मिक स्थल के हितों की सुरक्षा के साथ कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जा सके। फिलहाल, घटना की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद प्रशासन और पंडा समाज के बीच जांच तथा आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

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