रिपोर्ट डॉ अनमोल कुमार
पटना। बिहार सरकार के पूर्व मंत्री एवं विधायक, श्याम रजक ने कहा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री युवा तुर्क समाजवादी नेता, चन्द्रशेखर का जन्मशताब्दी समारोह 11 जुलाई को वीरचन्द पटेल पथ स्थित रवींद्र भवन में आयोजित किया गया है जिसमें बिहार के अलावे दूसरे प्रदेश से भी समाजवादी नेता आएंगे। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर समाजवाद और समरसता के प्रतीक युवा तुर्क समाजवादी नेता पूर्व प्रधानमंत्री के समाजवाद पर चर्चाएं होगी।
उन्होंने चन्द्रशेखर के युवा तुर्क बनने पर चर्चा करते हुए कहा कि आपातकाल के बाद जब कांग्रेस के युवा सांसदों ने सत्ता के खिलाफ बगावत की आवाज उठाई, तो उनमें सबसे तेज आवाज थी चंद्रशेखर की। दिल्ली की राजनीति में उनकी निडरता, साफगोई और सिद्धांतों के लिए उन्हें “युवा तुर्क” कहा जाने लगा। वो सत्ता के लिए नहीं, संघर्ष के लिए राजनीति में आए थे।
श्री रजक ने उनके जीवन और संघर्ष पर चर्चा करते हुए कहा
गांव के एक किसान परिवार से निकलकर चंद्रशेखर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम ए किया। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़कर वो छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे।
1975 आपातकाल में 19 महीने जेल में रहे, पर झुके नहीं।
उन्होंने कहा कि वे जनता पार्टी संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
उन्होंने कहा कि पदयात्रा1983 में कन्याकुमारी से राजघाट तक 4260 किमी की “भारत यात्रा” की। 6 महीने की इस यात्रा से उन्होंने आम जनता के दर्द को समझा।उन्होंने कहा कि इस पदयात्रा में मुझे भी शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में 7 महीने बने रहे।
1990 में वीपी सिंह सरकार गिरने के बाद, कांग्रेस के समर्थन से 10 नवंबर 1990 को वो देश के 11वें प्रधानमंत्री बने। उनका कार्यकाल सिर्फ 7 महीने का रहा, पर इस छोटे समय में भी उन्होंने:
विदेश नीति गुटनिरपेक्ष आंदोलन को मजबूती दी।
आर्थिक संकट खाड़ी युद्ध के बीच देश को आर्थिक तंगी से निकालने की कोशिश की
सामाजिक न्याय मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने में सहयोग किया।
उनकी सरकार गिर गई, पर उन्होंने कुर्सी के लिए समझौता नहीं किया।
विचार और विरासत
चंद्रशेखर “समाजवादी” थे, पर “व्यवहारिक” भी। वो कहते थे – “राजनीति सेवा है, धंधा नहीं।”
भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा मुखर रहे। किसानों, गरीबों और नौजवानों के हक की बात उठाया। सत्ता से दूर रहकर भी देश की नीतियों को प्रभावित करने की ताकत को बढाया।
उन्होंने कभी कोई बड़ा पद नहीं मांगा। 8 जुलाई 2007 में उनके निधन तक वो “जनता के सांसद” बने रहे।
17 अप्रैल 1927 में इब्राहिम पट्टी,बलिया, उत्तर प्रदेश में इनका जन्म हुआ था। श्री रजक ने जन्म शताब्दी पर संदेश देते हुए कहा कि
आज जब राजनीति में सिद्धांत कम और सौदेबाजी ज्यादा है, चंद्रशेखर का जीवन हमें याद दिलाता है कि राजनीति में ईमानदारी भी जिंदा रहा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि चन्द्रशेखर का यह वाक्या कि
मैं सत्ता के लिए पैदा नहीं हुआ, संघर्ष के लिए पैदा हुआ हूं” – ये वाक्य आज भी हर युवा नेता को प्रेरणा देता है।
जन्म शताब्दी पर उस “युवा तुर्क” को नमन, जिन्होंने कुर्सी नहीं, चरित्र से राजनीति की परिभाषा बदली । ( साक्षात्कार )




